Hut Near Sea Beach

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

House Boat

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Poly House

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Lotus Temple Delhi

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Enjoy holiday on Ship

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

मंगलवार, 5 मई 2015

ग्रीन सीमेंट

ग्रीन सीमेंट का कॉन्सेप्ट विनिर्माण के क्षेत्र में क्रान्तिकारी खोज है। इको-सिस्टम के दिन -प्रति- दिन खराब सेहत को दुरूस्त करने में यह सीमेंट अमोघ अस्त्र भी बन सकता है। इसे बनाने में अन्य सीमेंट की अपेक्षा ऊर्जा की ज़रूरत भी कम होती है और साथ ही वातावरण से कार्बन डायऑक्साइड का अवशोषण भी करता है। इंग्लैंड के वैज्ञानिकों ने इसे निर्माण क्षेत्र के लिये एक खूबसूरत तोहफा बताया है।
ग्लोबल वार्मिंग के कारण दुनिया भर के लोगों के माथे पर बल पड़ गये हैं। इसी कारण इको-सिस्टम की हालत दिन-प्रति- दिन खराब होती जा रही है। इससे बचने के लिये वैज्ञानिक हमेशा कुछ न कुछ उपाय करते रहते हैं। इको-सिस्टम को दुरूस्त करने के लिये वैज्ञानिकों ने इस बार विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े सीमेंट को टारगेट किया है। इस उद्योग के बारे में कहा जाता है कि जितना एविएशन सेक्टर कार्बन डाय ऑक्साइड उत्सर्जन करता है, उससे कहीं ज्यादा कार्बन डाय ऑक्साइड उत्पादन यह सेक्टर करता है। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसा सीमेंट बनाने का कॉन्सेप्ट तैयार किया है, जो ग्रीन हाउस गैस को अवशोषित कर लेगा। इससे निर्माण क्षेत्र में क्रान्ति आ सकती है। प्राकृतिक वातावरण को सामंजस्य कराने में भविष्य में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका हो जाएगी। ग्रीन बिल्डिंग के कॉन्सेप्ट में यह अनोखा सीमेंट एक इतिहास रचने को तैयार है। यूके के वैज्ञानिकों ने हाल में कहा है कि इस सीमेंट के निर्माण के समय कम कार्बन डायऑक्साइड का उत्सर्जन होने के साथ प्रयोग करते समय वातावरण में मौजूद कार्बन डाय ऑक्साइड का अवशोषण भी करता है,जिससे वातावरण में प्रदूषण पैदा करने वाली समस्या खत्म हो जाती है। कार्बन डाय ऑक्साइड पैदा करने में सीमेंट का वर्तमान में 5 प्रतिशत का योगदान है, जो पूरे विश्व के एविएशन सेक्टर में कार्बन डाय ऑक्साइड के उत्पादन से कहीं ज्यादा है। अनुमान है कि विनिर्माण क्षेत्र में 2020 ई. तक ग्रोथ रेट 50 प्रतिशत की रफ्तार में होगा। ऐसी स्थिति में यह सीमेंट वायु प्रदूषण से बचने का अमोघ अस्त्र बन सकता है। इस सीमेंट को नोवासेम कंपनी द्वारा विकास किया गया है। इस सीमेंट को बनाने के समय कई रॉ मैटेरियल्स का प्रयोग पुराने पोर्टलैंड सीमेंट के समान ही किये गये हैं। इसे बनाने के बारे में कंपनी के वरिष्ठï वैज्ञानिक Nikolaos Vlasopoulos कहते हैं कि जब इसे विकास किया जा रहा था, तब हम लोग चाहते थे कि यह एक ऐसा प्रोडक्ट्स बने जो कार्बन निगेटिव हो और हम लोगों का प्रयास सफल रहा। पुराने पद्धति पर पोर्टलैंड सीमेंट को बनाते समय लाइम स्टोन और क्ले के मिश्रण को 1,500 डिग्री सेल्सियस पर विशाल भट्टïी में गर्म किया जाता है। सीमेंट के साथ जिप्सम बनाने का यही आधार है। अन्तर्राष्टï्रीय ऊर्जा एजेंसी का अनुमान है कि प्रत्येक टन सीमेंट बनाने में 0.83 टन कार्बन डायऑक्साइड का उत्सर्जन होता है, इतना ही नहीं भट्टïी में लाइम स्टोन के साथ क्ले को मिलाने के समय लाइम स्टोन को डिकम्पोज करने में बहुत ज्यादा मात्रा में ऊर्जा की ज़रूरत पड़ती है, इस ऊर्जा के इस्तेमाल करने के समय ज्यादा मात्रा में प्रदूषण पैदा करने वाले तत्व वातावरण में मिल जाते हैं। इस रासायनिक
प्रक्रिया में उत्पन्न गैसें प्रदूषण पैदा करने में महत्ती भूमिका निभाते हैं। Nikolaos Vlasopoulos के अनुसार यदि आप इस उत्पादन के समय कुछ बातों का ख्याल रखें तो ष्टह्र२ का उत्सर्जन कुछ कम हो सकता है। हालांकि इस सीमेंट के निर्माण के समय चूना पत्थर के बजाय मैग्नीशियम ऑक्साइड का प्रयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया से पहला फायदा यह है कि मैग्नीशियम ऑक्साइड की मात्रा प्रचूर है और दूसरा के इस विधि से सीमेंट निर्माण में 650-750 डिग्री सेल्सियस ऊर्जा की जरूरत पड़ती है, जिसके कारण कार्बन डाय ऑक्साइड का उत्सर्जन भी कम होता है। वैज्ञानिकों ने इसे बनाते समय मैग्नीशियम सिलिकेट से मैग्नीशियम ऑक्साइड के रूप में परिवर्तित करने के तरीक भी प्रयोग में लाये हैं। इस प्रक्रिया से कम ईंधन के उपयोग के कारण जहां एक तरफ ऊर्जा की बचत होती है, वहीं दूसरी तरफ पूर्व के प्रयोग में सीमेंट बनाने के समय ऊर्जा के रूप में बायोमोस, कोयला, पेड़-पौधे और कोक, टायरर्स, मांस, हड्डïी और कुड़ा -करकट का प्रयोग से छुट्टïी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभा सकता है। इस बावत Vlasopoulos का कहना है कि सीमेंट बनाने वाली कंपनिया भी ऊर्जा बचत की दिशा की ओर पिछले दशक में कई महत्वपूर्ण कार्र्य किये हैं, जिससे ऊर्जा बचत के साथ वातावरण में कम से कम कार्बन डायऑक्साइड का उत्सर्जन हो। लेकिन समस्या यह है कि जब आप सीमेंट बनाते समय कोक और कोयला का इस्तेमाल भठ्ठïी में करते हैं तो तापमान को नियंत्रित रखना इतना आसान नहीं होता। यदि आप कम तापमान पर सीमेंट निर्माण करना चाहते हैं तो उसे भी किया जा सकता है लेकिन एक प्रोसेस के तहत। पोर्टलैंड सीमेंट बनाने के समय कार्बन डायऑक्साइड का उत्सर्जन Novacem's सीमेंट के अपेक्षा ज्यादा होता है। यह Novacem's सीमेंट उत्पादन के समय कार्बन डायऑक्साइड अवशोषित करके वातावरण को प्रदूषित होने से बचाता है। जहां Novacem's सीमेंट के निर्माण में 0.3 से 0.5 टन कार्बन डायऑक्साइड वातावरण से अवशोषित करने की क्षमता है, वहीं पोर्टलैंड सीमेंट के निर्माण में जहां 0.2 से लेकर 0.5 टन कार्बन डायऑक्साइड ही अवशोषित कर पाता है। Vlasopoulos कहते हैं कि सामान्य तौर पर एक टन सीमेंट उत्पादन में 0.4 टन कार्बन डायऑक्साइड का उत्सर्जन होता है, लेकिन इस नये कॉन्सेप्ट से 1.1 टन सीमेंट उत्पादन में मात्र 0.7 टन कार्बन डायऑक्साइड वातावरण से अवशोषित होता है, जो अपने आप में एक बड़ी बात है। गौरतलब है कि सामान्य तौर पर 1 टन स्टिल के निर्माण में 1.7 टन कार्बन डायऑक्साइड पैदा होता है। इस मामले में सीमेंट का वातावरण प्रदूषित करने में स्टिल के अपेक्षा कम भागीदारी भी इसे थोड़ा अलग भी करता है।
इस सीमेंट को बनाने वाली कंपनी की टीम मैग्नीशियम ऑक्साइड सीमेंट की रिसाइक्ल करने पर भी काम कर रही है। इसे प्रक्रिया से फायदा यह होगा कि सीमेंट को पुन: बनाया जा सकता है। इस प्रोसेस की अवधि भले ही लंबी हो लेकिन सफलता प्राप्त करना, इस टीम की एक मात्र ध्येय है। इस सीमेंट के बारे में Vlasopoulos का कहना है कि आने वाले दिनों में कर्मशल रूप में मैग्नीशियम सिलीकेट प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हो जाने से इस ग्रीन सीमेंट का कॉन्सेप्ट अपनी उफान पर रहेगा,जो विनिर्माण क्षेत्र में एक क्रांतिकारी परिवर्तन होगा।
1.पूरी दुनिया में प्रत्येक साल 2 बिलियन टन कार्बन डायऑक्साइड उत्सर्जन होता है, सीमेंट के उत्पादन में, जो पूरी दुनिया में उत्सर्जित कार्बन डायऑक्साइड का लगभग 5 प्रतिशत है।

मंगलवार, 31 मार्च 2015

रियल्टी हब दिल्ली -एनसीआर

रियल्टी हब के रूप में प्रसिद्ध दिल्ली एनसीआर रहने और निवेश दोनों के हिसाब से बेहतर है। एनसीआर के कई क्षेत्रों ने बेहद कम अवधि में भी रियल्टी सेक्टर के इन्वेस्टर्स को अ'छे रिटर्न दिए हैं। यह स्थान प्रगति के पथ पर अग्रसर है। निर्माण की दुनिया में नित नई इबारत लिखने वाला यह स्थान बहुत कम समय में रियल एस्टेट के लिए नज़ीर बन कर उभरा है। देश के नामी-गिरामी डेवलपर्र्स यहां पर डेवलपमेंट कर रहे हैं। आइए नज़र डालते हैं यहां के प्रमुख स्थानों पर। 
गुडग़ांव-यह स्थान रियल एस्टेट के हब के रूप में उभरा है। यहां पर कई ऑप्शंस उभरे हैं। यहां हाई एंड यूजर्स के लिए तो ऑप्शन की कमी न पहले कमी थी, न ही अब है। गुडग़ांव एक्सटेंंशन या न्यू गुडग़ांव जैसे इलाकों में लोअर मिडिल और मिडिल क्लास के हिसाब के भी काफी कुछ है। गुडग़ांव एक्सटेंशन या फिर न्यू गुडग़ांव स्थित प्रोजेक्टों में मिलने वाली सुविधाओं की बात करें तो, इनमें आपके लाइफ स्टाइल से सूट करतीं तमाम चीजें मुहैया कराई जा रही हैं। थीम्ड प्रोजेक्ट के रूप में आपके पास गोल्फ कोर्स का ऑप्शन है तो बेहतर और लग्जरीयस होम के रूप में विला और इंडिपेंडेंट फ्लोर आदि का। खरीददारों के एंगल से एक अच्छी  बात यह है कि यहां पर अन्य जगह की तरह प्रोजेक्ट्स को लेकर कोई विवाद भी नहीं है। ज्यादातर  प्रोजेक्ट  फ्रीहोल्ड ज़मीन पर हैं। 
गुडग़ांव
गुडग़ांव में लग्जरी प्रोजेक्ट की भी भरमार है। गुडग़ांव में ज्यादातर  प्रोजेक्ट्स कम से कम & बीएचके के ही दिखते हैं , लेकिन जो प्रोजेक्ट नए सेक्टरों में बन रहे हैं , या फिर जिनमें ज्यादा  फ्लोर बनाए जा रहे हैं , उनमें फिर भी रेट कम है। एनएच -8 के निकट स्थित इस प्रोजेक्ट में 2, & और 4 बीएचके के ऑप्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। धारुहेड़ा की ओर बढ़ जाएं तो अरावली हाइट्स हर पॉकेट को सूट करने वाला विकल्प है। 
ग्रेटर नोएडा एक्सटेंशन-यह स्थान रहने और निवेश के लिहाज से बेहतर इलाका है। इसका क्षेत्रफल चंडीगढ़ से भी तीन गुणा होगा। इलाके की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चंडीगढ़ 114 वर्ग किमी क्षेत्र पर बसा हुआ है। ग्रेटर नोएडा एक्सटेंशन इलाके में ग्रेटर नोएडा, हापुड़, बुलंदशहर और सिकंदराबाद के 178 गांवों के हिस्से शामिल होंगे।  2021 तक इस इलाके में 12 लाख लोगों के रहने का अनुमान है। 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र का विकास इंटरनैशनल लेवल की चौड़ी सड़कों, अंडरग्राउंड केबलिंग और ड्रेनेज सिस्टम के साथ किया जा रहा है। यहां रहने वालों को ओपन स्पेस, सजे-संवरे लॉन और ड्राइविंग के लिए काफी चौड़ी सड़कें मिलेंगी। बिजली और पानी की बात करें, तो इन चीजों की भी चौबीसों घंटे आपूर्ति करने की प्लानिंग है। 
एनसीआर की सबसे बड़ी सबसिटी ग्रेटर नोएडा के तहत ग्रेटर नोएडा एक्सटेंशन का भी विकास किया जा रहा है। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 1, 2, &, 4 आदि इसके तहत शामिल किए गए हैं। करीब 58,000 हेक्टेयर में बसाई जा रही इस सब-सिटी में आने वाले समय में काफी संभावनाएं बताई जा रही हैं। यह इलाका डीएनडी
फ्लाईओवर और सिक्स-लेन ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस - वे के जरिये दिल्ली के बस आधे घंटे की ड्राइव पर है। 
बेहतर है नोएडा - एक्सपर्ट की राय में एनसीआर में नोएडा इलाके को बेहतर चाइस कहा जा सकता है। यह सब -सिटी भी लाइफ स्टाइल फैक्टर के हिसाब से बढ़ रही है। अथॉरिटी ने इसके लिए काफी इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराने की तैयारी की है। इसमें ट्रैफिक मैनेजमेंट से लेकर फ्लाईओवर, मेट्रो लाइन, पार्क, सड़कों को चौड़ा करना, पुल निर्माण आदि शामिल है। नोएडा अथॉरिटी ने एक्सप्रेसवे को चौड़ा करने, पुल और फ्लाईओवर आदि का काम शुरू भी कर दिया है। कई भीतरी और बाहरी सड़के चौड़ी की जा रही हैं। 
यही वजह है कि मिडिल क्लास की रोज बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कई डेवलपर्स उभरते हुए सेक्टरों में अपने प्रोजक्ट ले कर आ रहे हैं। ईस्टर्न पेरिफेरियल एक्सप्रेस - वे और यमुना एक्सप्रेस -वे आदि इस इलाके से लगते हुए एक्सप्रेस - वे हैं। नोएडा और ग्रेटर नोएडा इलाके में इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता ही इलाके को एनसीआर के अन्य इलाकों से अलग बनाती है।
राज नगर एक्सटेंशन 
राजनगर एक्सटेंशन मध्य वर्ग की पहली पसंद बनकर उभर रहा है, इसकी एक बड़ी यह भी है कि यहां कीमतें लोगों की पहुंच में हैं। कनेक्टिविटी ने भी इस इलाके की डिमांड बढ़ा दी है। बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए प्राइवेट बिल्डरों ने अथॉरिटी से हाथ मिला लिए हैं और दोनों मिलकर अ'छे विकास को अंजाम दे पा रहे हैं। 
 यह स्थान एनसीआर में बजट होम के लिए प्रसिद्ध है। यहां का वातावरण और जलवायु दोनों ही काफी अ'छा है। यहां ओपन स्पेस बहुत बड़ा है। साथ ही हिंडन नदी का बाढ़ प्रभावित इलाका भी है, जहां कभी कन्सट्रक्शन नहीं होना है। इंडियन एयर फोर्स द्वारा जंगल डेवलप किया गया है। दूर-दूर तक कोई इंडस्ट्री नहीं है। यहां के पानी का टीडीएस बहुत कम है। कन्सट्रक्शन के लिए जो पानी की टेस्टिंग की गई थी, इसकी रिपोर्ट ड्रिंगकिंग वाटर की है। रेट के अनुसार यह स्थान एनसीआर में सबसे अ'छा है। यहां पर हर सेग्मेंट का फ्लैट है। यहां पर &1 डेवलपर्स तो एशोसिएशन के सदस्य हैं।  इतने ही बिल्डर्स और होंगे, जिन्होंने लैंड यहां पर खरीद ली है। यहां का यूएसपी कनेक्टिविटी है। इस स्थान का दिल्ली-मेरठ और हापुड की ओर आते हैं तो बेहतर एप्रोच है। मेट्रो भी अर्थला तक आ रही है, जो मुश्किल से &-4 किमी. की दूरी पर होगी। यह अभी प्रस्तावित है। यह स्थान रहने के लिहाज से एक बेहतर विकल्प के रूप में उभरा है। राजनगर एक्सटेंशन की सबसे बड़ी बात यह है कि यह फ्री होल्ड है। यह लीज होल्ड नहीं है। जैसा कि अथॉरिटी को कुछ स्थानों के ऊपर लीज होल्ड को लेकर समस्याएं आई थी, यहां ऐसी कोई बात नहीं है। यहां पर बिल्डर्स सीधे किसान से ज़मीन लेता है और जीडीए (गाजि़याबाद विकास प्राधिकरण)के नॉर्म को फॉलो करते हुए मैप सेक्शन करवाता है। इसका लोकेशन इसे खास बनाता है। राज नगर एक्सटेंशन नए मेरठ बाईपास पर स्थित है। बाईपास के निकट होने के कारण इसका सबसे बड़ा फायदा यह भी है कि दिल्ली और दूसरे शहरों में आने जाने के लिए लोगों को मेरठ और गाजियाबाद के भीड़ वाले इलाके से नहीं गुजरना पड़ेगा। एक नजर डाली जाए तो दिल्ली और नोएडा पहुंचने में यहां से 15 मिनट, ग्रेटर नोएडा- &5 मिनट, वसुंधरा- 10 मिनट, इंदिरापुरम- 10 मिनट, वैशाली- 10 मिनट, मेरठ और हापुड़ 40 मिनटों में पहुंचा जा सकता है।  अफोर्डेबल होने के कारण  राजनगर एक्सटेंशन ऐसा डेस्टिनेशन बनता जा रहा है, जहां प्रॉजेक्ट्स मध्य वर्ग की जेब की पहुंच में हैं। यहां 1 बीएचके से & बीएचके तक मिल जाएंगे। इनकी रेंज 12 लाख से लेकर 40 लाख रुपये तक है। यहां जॉगिंग ट्रैक से लेकर एंटरटेनमेंट और शॉपिंग से संबंधी सभी सुविधाएं मुहैया होंगी। यूपी सरकार ने यहां गल्र्स हॉस्टल, वकेशनल कॉलेज, ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट बनाने की घोषणा भी की है। एक बड़ा स्कूल पहले ही शुरू हो चुका है। कई और डिवेलपर्स 
मिडल क्लास के लिए प्रॉजेक्ट लेकर यहां आ सकते हैं।
क्रॉसिंग रिपब्लिक- दिल्ली के आसपास घर चाहने वालों के लिए क्रॉसिंग्स रिपब्लिक एक बेहतर ऑप्शन है। यह इलाका न सिर्फ गाजि़याबाद के निकट है बल्कि नोएडा , ग्रेटर नोएडा और दिल्ली से भी अ'छी तरह जुड़ा है। यह लोकेशन एक तरह से लाइफ स्टाइल डेस्टिनेशन बन गया है। डिवेलपर्स यहां सही कीमतों पर तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे करते हैं।  यहां अपार्टमेंट्स के साथ - साथ विला के आप्शंस भी हैं। इसका लोकेशन भी इसे खास बनाता है। इलाके के स्थिति की बात करें तो इसकी दूरी दिल्ली के रेलवे स्टेशनों या एयरपोर्ट वगैरह से उतनी ही है जितनी बाहरी या पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों की है। यह नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से करीब 25-26 किमी , इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से &5 किमी और आनंद विहार बस अड्डे से 19-20 किमी है। इलाके के एन -24 के निकट स्थित होने के कारण कम्युनिकेशन की समस्या कम है। 
मॉडर्न लाइफ स्टाइल के लिहाज से देखें तो यहां सभी प्रकार की सुविधाएं हैं। हॉस्पिटल , स्कूल , पुलिस स्टेशन , होटल और कई मॉल फिलहाल बन रहे हैं। रेजिडेंशल कॉम्पलेक्स में डिवेलपर जिम , क्लब स्वीमिंग पूल और तरह तरह के खेल की सुविधाएं मुहैया करा रहे हैं। यहां के मॉल्स भले अभी बन रहे हैं , लेकिन वैशाली और इंदिरापुरम जैसे इलाकों के पास स्थित होने के कारण शॉपिंग की कोई समस्या नहीं है। निवासी वहां के मॉल्स का मजा ले रहे हैं। इन इलाकों में देश के नामी-गिरामी बिल्डर्स डेवलप का काम कर रहे हैं। 
ग्रेटर फरीदाबाद-ग्रेटर फरीदाबाद एनसीआर के शहरों को तेज़ी से पछाडऩे के लिए तैयार है। नए कंस्ट्रक्शन, साथ-सुथरे रोड और व्यवस्थित पार्किंग व पार्कों की प्लानिंग को देखकर इनवेस्टरों ने इधर का रुख किया है। अ'छी बात यह है कि एनसीआर के अन्य शहरों के मुकाबले फरीदाबाद में पुरानी मल्टीस्टोरी बिल्डिंगों की संख्या कम है। दिल्ली-एनसीआर में विकास की लहर को फरीदाबाद ने तेजी दी है। यह शहर विकास की नई इबारत लिखने को तैयार है। नहरपार के नाम से जाने जाना वाला ग्रेटर फरीदाबाद इलाके के विकास की प्लानिंग ग्रेटर नोएडा से कम नहीं है। चौतरफा विकास का स्वागत कर रहा यह इलाका अब दिल्ली एनसीआर व अन्य इलाकों के लोगों का बांहें फैला कर स्वागत कर रहा है। फरीदाबाद में देरी से शुरू हुए विकास का सबसे बड़ा लाभ आज मिल रहा है। ग्रेटर फरीदाबाद में तेजी से डिवेलप हो रहे प्रोजेक्ट्स पूरी वैधता से और लाइसेंस लेकर बनाई जा रही हैं। छोटे-बड़े बिल्डरों के फ्लैट, डुप्लेक्स, कोठियां पूरी तरह से भूकंपरोधी तकनीक पर बनाई जा रही हैं। नए कंस्ट्रक्शन, साथ सुथरे रोड और व्यवस्थित पार्किंग व पार्कों की प्लानिंग को देखकर इनवेस्टरों ने इधर का रुख किया है। 
 ग्रेटर नोएडा-यह गाजियाबाद के करीब इंडिग्रेटेड टाउनशिप और बिल्डर प्लॉट्स आदि नोएडा और गाजि़याबाद से मात्र दो किलोमीटर की दूरी पर हैं। नये सेक्टरों के लिए जमीन नोएडा के सेक्टर-71 और 76 के निकट स्थित कई गांवो से एक्वायर की गई है। नॉलेज पार्क -5 और इकोटेक एक्सटेंशन को इंस्टीट्यूशनल और इंडस्ट्रीयल यूनिट्स के लिए विकसित किया जा रहा है। जीएनआईडीए की कोशिश इस सबसिटी को वल्र्ड क्लास टाउनशिप के रूप में विकसित करने की है। इसी के तहत यहां 75 एकड़ जमीन पर इंस्टीट्यूशनल हब और 50 एकड़ जमीन पर एजुकेशनल हब बनाने की दिशा में पहल हो चुका है। हाईप्रोफाइल गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी यहां शुरू हो चुकी है। यहां से होते हुए 1,48& किलोमीटर लंबे दिल्ली- मुंबई कॉरिडोर की भी प्लानिंग है। इससे इलाके में एक्सपोर्ट - इंपोर्ट जैसे कामों को भी काफी बढ़ावा मिलेगा। अथॉरिटी एनएच -24 और एनएच -91 के बीच स्थित ग्रेटर नोएडा फेज -2 को एक इंटीग्रेटेड टाउनशिप की तरह डिवेलप कर रही है। इसका मास्टर प्लान भी बनाया जा चुका है और इसके हिसाब से काम बढ़ रहा है। यहां जनसंख्या बढ़ोतरी के हिसाब से काम हो रहा है। यहां आने वाले समय में इंडस्ट्रीयल डिवेलपमेंट भी देखने को मिलेगा। यही वजह है कि सिटी एरिया को बढ़ाने का प्रस्ताव भी पास कर दिया गया है। 
नोएडा एक्सप्रेस-वे 
एक्सप्रेस - वे पर सेक्टर -1&7 और 14& तेजी से उभर रहे हैं। इन सेक्टरों में तेजी से हो रहे डिवेलपमेंट की वजह है यहां मल्टीनेशनल कंपनियों की स्थापना और इसके साथ कई महत्वपूर्ण रेजिडेंशल प्रोजेक्ट्स का लॉन्च होना। इन सेक्टरों का फ्यूचर ब्राइट बताया जा रहा है। इसकी वजह लोकेशन है। यहां से दिल्ली और नोएडा की कनेक्टिविटी अ'छी है। इनके इर्द - गिर्द स्कूल , कमर्शल हब और अस्पताल आदि का भी निर्माण हो रहा है।
एक्सप्रेस-वे 
नोएडा-ग्रेटर नोएडा को जोडऩे वाले एक्सप्रेस- वे के किनारे और इसके निकटवर्ती सेक्टर्स में प्राइवेट बिल्डर्स के कई प्रोजेक्ट्स देखने को मिलते हैं। इसके अलावा कई नए प्रोजेक्ट्स आने वाले हैं। इंडस्ट्रियल महत्व के दो शहरों के अलावा इस एक्सप्रेस-वे के जरिये अगले साल, उत्तर प्रदेश के धार्मिक और पर्यटन के लिहाज से बेहद खास माने जाने वाले मथुरा और आगरा को भी जोड़ लिया जाएगा। ऐसे में इस मार्ग को निवेश की संभावनाओं के तौर पर देखा जा सकता है। यही नहीं साल 2005-06 में जब से इस एक्सप्रेस-वे का बड़ा हिस्सा तैयार हो गया था, उसके बाद से ही इसके जरिये जुडऩे वाले नोएडा के सेक्टर्स की डिमांड बढऩी भी शुरू हो गई थी। बीते दशक के मध्य से लेकर यह एक्सप्रेस-वे आज भी निवेश के लिहाज से हॉट लोकेशन में गिना जाता है। 
एक्सपर्ट की राय में एनसीआर को जोडऩे के लिए एफएनजी और केएमपी को भी एक्सपे्रस-वे के रूप-रंग में तैयार किया जा रहा है। केएमपी का काफी काम पूरा हो गया है। ऐसे में इस एक्सपे्रस-वे के निकटवर्ती क्षेत्रों में निवेश लाभ का सौदा बन सकता है। कुंडली, पलवल, धारुहेड़ा और बावल जैसे इलाकों को इस एक्सपे्रस- वे से लाभ मिलेगा। ऐसे में इन शहरों में निवेश के विकल्प भी तलाशे जा सकते हैं। 
बहादुरगढ़ 
मेट्रो के तीसरे फेज के निर्माण का कार्य आरंभ हो चुका है। नांगलोई से मुंडका होते हुए, इसी चरण के अंतर्गत मेट्रो ट्रेन की सुविधाओं को बहादुरगढ़ तक बहाल किया जाना है। मेट्रो के ट्रैक जहां भी बिछे हैं, वहां की संपत्तियों के दामों में तेजी देखने को मिली है। ऐसे में बहादुरगढ़ भी निवेश के लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है। संपत्ति मामलों के जानकार प्रदीप मिश्र के मुताबिक इस शहर में प्लॉट में निवेश करने के लिए 6 से 8 हजार रुपये मीटर का विकल्प रखना होगा। इसके अलावा शॉट टर्म इन्वेस्टर्स के लिहाज से भी बहादुरगढ़ एक परफेक्ट डेस्टिनेशन साबित हो सकता है। 
बागपत 
इस शहर को भी उत्तर प्रदेश के तेजी से उभरते शहरों के रूप में देखा जा रहा है। दिल्ली सहारनपुर राजमार्ग के जरिये जुडऩे वाले शहर में भी लांग टर्म इन्वेस्टमेंट की संभावनाएं तलाशी जा सकती है। इस शहर का निवेश फायदे का सौदा इसलिए भी हो सकता है क्योंकि दिल्ली सहारनपुर राजमार्ग को आठ लेन तक चौड़ा करने की योजना पर जल्दी ही काम आरंभ कर दिया जाएगा। इसके अलावा कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिहाज से किंग्Óवे कैंप के निकट यमुना पर पुल बनाने की योजना भी है। यदि ऐसा हो जाता है तो उत्तरी दिल्लीसे इस तरफ पहुंचने में 10 से 15 मिनट का वक्त लगेगा। 
दिल्ली सहारनपुर राजमार्ग पर ट्रॉनिका सिटी से चंद किलोमीटर आगे चलते ही निजी क्षेत्र के बिल्डर्स की कई परियोजनाएं यहां देखने को मिलती हैं। टाटा हाउसिंग जमीन लेने के बाद जहां इस तरफ अफोर्डेबल हाउसिंग के प्रोजेक्ट लाने पर विचार कर रहा है तो वहीं महावीर हनुमान ग्रुप ने यहां प्लॉटेड डेवलपमेंट की है। इस प्रोजेक्ट में लोकेशन के मुताबिक 6 से 7 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर के रेट पर प्रॉपर्टी ली जा सकती है। 
 लेकिन निवेश से पहले उस क्षेत्र की संभावनाओं पर एक नजर जरूर डाल लें। साथ ही जिस प्रोजेक्ट में आप निवेश कर रहे हैं उसे कौन बना रहा है, इसकी परख भी जरूरी है? रियल्टी सेक्टर में भी ब्रांड वैल्यू का महत्व बेहद अधिक है। जहां भी निवेश करें, देखें कि उस संपत्ति के साथ किसी तरह का कोई विवाद न जुड़ा हो।

मंगलवार, 17 मार्च 2015

रीसेल होम



Your Feedback is Valuable to Us.
Please write to journalist.iimc@gmail.com
Cell Number-9910046309





रविवार, 8 मार्च 2015

The Mitchell Corn Palace


 मकई या कॉर्न भी इमारत का इबारत लिख चुका है। वह भी प्रसिद्ध स्थानों पर। यह पढ़कर भले ही आप कुछ देर के लिए सोच में पड़ जाएं, लेकिन हकीकत यह है कि अमेरिका के The Mitchell  में इसके सहारे महल का निर्माण किया गया है। यह स्थान अमेरिका के दक्षिण डकोटा राज्य में स्थित है। The Mitchell  अमेरिका ही नहीं पूरे विश्व में प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। इस पर्यटन स्थल को The Mitchell Corn Palace चार चांद लगा रहा है। मिचेल में प्रत्येक साल 5 लाख से ज्यादा पर्यटक आते हैं। इस महल को नया रूप क्रोप आर्ट के सहारे दिया गया है। इसका भित्तिचित्र और डिज़ाइन को कॉर्न और अन्य अनाजों से सुन्दर रूप  में ढाला गया है। यह स्थान कई महत्वपूर्ण गेम्स का मेजबानी भी कर चुका है। खासकर, डकोटा वेसलीयेन यूनिवर्सिटी (Dakota Wesleyan University) और Mitchell High School Kernels के बीच बॉस्केट बॉल के मैच के समय इसकी लोकप्रियता का ग्राफ काफी ऊंचा हो चला था। मिचेल पेलैस का उद्धाटन वर्ष 1892 में किया गया था। इसका निर्माण उस समय लोगों को यहां पर बसने के लिए प्रोत्साहित करने का एक तरीका था। चूंकि दक्षिणी डकोटा में काफी उपजाऊ भूमि है और यहां पर अनाजों का उत्पादन काफी बेहतर होता है। इस महल को कॉर्न से बनाने के पीछे शायद यही कॉन्सेप्ट रहा होगा कि यह स्थान मानव बस्ती के लिए बेहतर है। हालांकि शुरुआती दौर में यह लकड़ीनुमा किला के रूप में था, जिसे वर्ष 1904-05 में बनाया गया। इस लकड़ीनुमा किले को कालान्तर में कॉर्न पैलेस के रूप में बदला गया। फिर वर्ष 1921 में इसे फिर से बनाया गया, जिसे शिकागो की प्रसिद्ध कंपनी रैप एंड रैप ने तैयार किया। इस महल में वर्ष 1937 में गुम्बद और मीनार के संरचना को जोड़े गए। कॉर्न पैलेस का शिखर 26.2 मीटर है। इसकी छत करीब 20.7 मीटर और फ्लोर्स की संख्या 2 है। महल में फ्लोर एरिया 4042.2 स्क्वेयर मीटर के क्षेत्र में विस्तृत है। प्रत्येक साल इसके रूप और रंग में कुछ न कुछ खास प्रकार के परिवर्तन किए जाते हैं। इस परिवर्र्तन में हर बार कुछ न कुछ खास थीम ज़रूर होता है। इस थीम को यहां के स्थानीय कलाकर तैयार करते हैं। वर्ष 1948 से लेकर 1971 तक इसके पैनल ( फलक) की संरचना को जीवंत स्वरूप ऑस्कर हो  (Oscar Howe) नामक कलाकार ने तैयार किया था। मिचेल कॉर्न पैलेस की दीवारों को अद्भुत रूप में  कैलविन शुल्ट्ज़ ने 1977 से लेकर 2002 तक तैयार किया था। वर्ष 2003 में इसकी दीवारों की सजावट को  शर्री रांस्डेल्स ने जीवंत रूप दिया। इस स्थान की लोकप्रियता का अनुमान आप इसी से लगा सकते हैं कि अमेरिका के राष्टपति बाराक ओबामा यहां पर आ चुके हैं। प्रत्येक साल The Mitchell Corn Palace सजाने में करीब 1.5 लाख डॉलर का खर्च होता है।  

शनिवार, 7 मार्च 2015

टाइटिल यानि नो चिंता, नो फिक्र

Pls Visit- http://www.propertysansar.in

Your Feedback is Valuable to Us.
Please write to journalist.iimc@gmail.com
Cell Number-9910046309










निवेश का बेहतर विकल्प- सिप

Pls Visit- http://www.propertysansar.in
Your Feedback is Valuable to Us.
Please write to journalist.iimc@gmail.com
Cell Number-9910046309










डिमांड में है बिज़नेस सेंटर


एक्सपर्ट की राय में आने वाले समय में मनोरंजन के साथ-साथ व्यवासायिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए एकमात्र जगह बिज़नेस सिटी सेंटर होगा। जहां मध्यम वर्गीय परिवार की घरों की ज़रूरत के लिए कई डेवलपर्स के प्रोजेक्ट होंगे, वहीं मनोरंजन और व्यवसायिक ज़रूरत के लिए बिज़नेस सिटी सेंटर महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। इस बिज़नेस सेंटर के आस-पास रहने वाले लोगों की ज़रूरत को ध्यान में रखकर इसका निर्माण किया जाएगा। यहां पर निवेश करने वाले निवेशकों को इसका फायदा आने वाले समय में उठाएंगे। इस प्रकार का निर्माण  शॉपिंग हब और मनोरंजन स्थल के रूप में प्रसिद्ध होगा। ऐसे भी देखा जाय तो आज की भागदौड़ भरी जि़न्दगी में हर कोई चाहता है कि उसे एक ही छत के नीचे सारा सामान मिले। खरीदारी ऐसी जगह से हो जहां शापिंग का भरपूर आनन्द आए। जगह साफ-सुथरी और दुकान के बाहर शोकेसों में आकर्षित करने वाले बढिय़ा-बढिय़ा प्रोडक्ट डिस्पले हों। बिज़नेस सिटी सेंटर एक ऐसा दुनिया बनने जा रहा है, जहां पर उपभोक्ता को एक ही छत के नीचे सभी ज़रूरी चीज़ें आसानी से मिलेगी। कॉमर्शियल दुनिया को एक बेहतर स्वरूप में इसका अहम योगदान होगा। आने वाले समय में यह मनोरंजन, लाइफ स्टाइल और शॉपिंग करने का एक अपना ही अंदाज़ प्रस्तुत करेगा। बिज़नेस सिटी सेंटर आधुनिकतम एस्क्लेटर, ग्लास लिफ्ट, लाइटिंग, कलर कॉम्बिनेशन, पेड़-पौधों और पार्किंग आदि का इस तरह से संयोजन किया जाएगा कि इसकी खूबसूरती देखते ही बनेगी। बिज़नेस सिटी सेंटर रहने वालों के लिए वे सभी सुविधाएं प्रदान करेगा, जो उनकी ज़रूरत है। इस प्रकार के आधुनिक कॉमर्शियल कॉम्प्लैक्स यहां की ज़रूरत को ध्यान में रखकर ही बनाया जाएगा। इस स्थान की कनेक्टिविटी अन्य स्थानों से बेहतर होगा। मेट्रो रेल और हाई स्पीड ट्रेन इन स्थानों पर दस्तक देने वाली है, जो निश्चित रूप से यहां रहने वालों के लिए आवागमन में काफी मदद्ïगार साबित होगी। जो एक ग्राहक के शॉपिंग और मनोरंजन के समय आवश्यक होती है। यह एक छत के नीचे ग्राहक की सभी आवश्यकताओं को पूरा करेगा। जहां यहां एक तरफ ऑटोमैटिक लिफ्ट, चमचमाता एलीवेट होंगे, वहीं मनोरंजन के लिए मल्टीप्लेक्स होगा। खाने के शौकीनों के लिए एनसीआर में बेस्ट रेस्तरां होंगे वहीं शॉपिंग के लिए यहां पर विभिन्न नामचीन ब्रांड केस्टॉर होंगे। तमाम बेहतरीन ब्रांड इसमें लाने के लिए बात की जा रही है। बिज़नेस सेंटर यदि निवेशकों के लिहाज से देखा जाए तो यह कॉमर्शियल स्पेस खरीदने वालों के लिए सबसे बेहतरीन स्थान है। इसका कारण इसकी शानदार लोकेशन का होना है। जिन स्थानों पर रेजीडेंशियल हब होंगे, वहीं इन फ्लैटों में रहने वालों के लिए यह स्थान शॉपिंग और मनोरजंन हब बनेगा। जो सभी की ज़रूरतों को पूरा करेगा। 

रिसर्च रिपोर्ट


सरवाइवल और रिवाइवल इंडियन रियल्टी सेक्टर नामक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में करीब 43 मिलियन स्क्वेयर फीट रिटेल स्पेस  की मांग है। कॉमर्शियल ऑफिस मार्केट के बारे में रिपोर्ट का अनुमान है कि आने वाले कुछ समय में यह मार्केट भी बेहतर स्थिति में होगा और डिमांड और सप्लाई के स्तर पर मार्केट संतुलित रूख अपनाएगा। रपट में बताया गया है कि आने वाले पांच सालों में बैंगलूरू में जहां 34 मिलियन स्क्वेयर फीट ऑफिस स्पेस की ज़रूरत हो सकती है, वहीं चैन्नई में करीब 27 मिलियय स्क्वेयर फीट ऑफिस स्पेस की आवश्यकता महसूस की जा सकती है। इस विकास की रफ्तार को आगे बढ़ाने में बेहतर इकॉनमी ग्रोथ, सकारात्मक मार्केट रूख और आत्मविश्वास से भरा कॉरपोरेट सेक्टर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।  रिटेल सेक्टर को लेकर बताया गया है कि इन सात प्रमुख शहरों में करीब 43 मिलियन स्क्वेयर फीट स्पेस की ज़रूरत होगी। अनुमान लगाया गया है कि अकेले बैंगलूरू में रिटेल स्पेस के लिये करीब सबसे ज्यादा 6.8 मिलियन स्क्वेयर फीट रिटेल स्पेस की आवश्यकता होगी। पुणे के बारे में बताया गया है कि आने वाले पांच सालों में सबसे ज्यादा वार्षिक वृद्धि के साथ जो करीब 51 प्रतिशत की दर से रिटेल स्पेस की मांग बनी रहेगी। इन स्थानों पर जो स्पेस की मांग बढ़ेगी, इसमें यमुना एक्सप्रेस-वे, इकॉनमी ग्रोथ के कारण बिज़नेस का ग्लोबल स्वरूप और सरकार की बेहतर आर्थिक नीति प्रमुख भूमिका निभा सकता है। शहरीकरण का बढ़ता दायरा, बढ़ती आमदनी ये दोनों कारक रिटेल और बिज़नेस सेंटर साकारात्मक प्रभाव डालेगा। जिसके कारण इन क्षेत्रों में स्पेस की मांग निश्चियत ही बढऩे का अनुमान है। एनसीआर के बारे में अनुमान लगाया गया है कि रिटेल सेक्टर में मांग काफी ऊंची रहेगी, क्योंकि यहां का वाणिज्यिक दृष्टिïकोण के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक दृष्टिïकोण का भी बहुत महत्व रहेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन क्षेत्रों में इस साल तक रिटेल स्पेस की मांग 66.6 मिलियन स्क्वेयर फीट और रिटेल के 10.20 लाख हाउसिंग यूनिट्स की ज़रूरत होगी। इस सेक्टर को बूम तक ले जाने में कई कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। पहली बात मुंबई को देश की औद्योगिक राजधानी होने का फायदा होगा और दूसरी बात यह है कि औद्योगिक राजधानी होने के कारण यहां ग्लोबल होती दुनिया से बिज़नेस के लिये हमेशा लोग आते-जाते रहेंगे। यहां पर रिटेल स्पेस की मांग करीब 6.19 मिलियन स्क्वेयर फीट स्पेस की हो सकती है। पुणे के बारे में बताया गया है कि यहां पर रिटेल स्पेस  वार्षिक ग्रोथ रेट 51 प्रतिशत स्तर की दर से करीब 1.76 मिलियन स्क्वेयर फीट स्पेस की मांग होगी। यहां की बढ़ती आबादी इन सब मामलों में महत्चपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बैंगलूरू के बारे में बताया गया है कि इस साल तक करीब 7 मिलियन स्क्वेयर फीट रिटेल सेक्टर के लिये ज़रूरत होगी। बैंगलूरू  में इन सेक्टरों में मांग की वृद्धि दर करीब 14 प्रतिशत के आस-पास होगी। बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर, बेहतर निर्माण और प्रतिस्पर्धा से भरे मार्केट ऐसे मुख्य कारक होंगे, जिसके कारण यहां के कॉरपोरेट सेक्टर को फायदा होने के साथ-साथ ऑफिस स्पेस की मांग बनी रहेगी। अब हम दक्षिण भारत के प्रमुख शहर हैदराबाद की बात करें तो इस रपट में स्पष्टï कहा गया है कि जहां ऑफिस स्पेस की मांग करीब 16.6 मिलियन स्क्वेयर फीट रहेगी, वहीं करीब बैंगलूरू की तरह ही करीब 3 लाख हाउसिंग यूनिट्स की ज़रूरत होगी। रपट बताती है कि यहां पर वार्षिक ग्रोथ रेट करीब 14 प्रतिशत होने का अनुमान है। रपट में पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के बारे में बताया गया है कि यहां पर करीब 9 मिलियन स्क्वेयर फीट ऑफिस स्पेस की जहां आवश्यकता है, वहीं रिटेल के लिये करीब 4.5 मिलियन स्क्वेयर फीट स्पेस की आवश्यकता होगी। यह रिपोर्ट रियल एस्टेट के लिए काफी सकारात्मक रूप दर्शा सकता है। रियल्टी 2014 को इंवेस्टमेंट के परिप्रेक्ष्य से अगर देखा जाए तो मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, बैंगलुरू , कोलकाता, हैदराबाद, अहमदाबाद, पूणे, गुडगांव, चंडीगढ, तथा जयपुर भारत के ऐसे शहर हैं, जो कमर्शियल प्रोपर्टी में इंवेस्ट करने के लिए हॉट स्पॉट के रूप में पहले से बेहतर ढंग से उभर सकता है। बहुत सारे माने हुए डेवलपर्स जैसे डीएलएफ, हिरानंदानी, रहेजा, वाटिका, पल्र्स तथा बेस्ट ग्रुप काफी बडी राशि रियल एस्टेट के विकास में लगा रहे हैं। भारत अपनी विरासत से अपने बेहतर भविष्य का निर्माण करने की क्षमता रखता है। इस वक्त भारत की जनसंख्या बढ तो रही है लेकिन इसका एक पक्ष यह भी है कि इसकी 54 प्रतिशत जनसंख्या की उम्र 25 साल से कम है। इन युवाओं में कठोर मेहनत कर बाजार से 'यादा से 'यादा सुविधाएं अर्जित करने तथा 'यादा मांग को बढावा देने की ताकत है। यह भारत के विकास की दौड के लिए लंबी रेस के घोड़े साबित होंगे। आईटी तथा बीपीओ सेक्टर सिर्फ ऑफिस स्पेस को सजाने-संवारने तथा बेहतरीन जॉब अपॉर्चुनिटिज देने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि नौकरी की तलाश में दूसरे शहरों या गांवों से पलायन करने वालें के लिए यह रेजिडेंशियल प्रॉपर्टीज में भी संभावनाओं को बढ़ा रहे हैं और फिर बढती आमदनी तथा रिटेल और मॉल कल्चर के फैलते चलन ने भी रियल एस्टेट के क्षेत्र को विस्तार दिया है। 

शुक्रवार, 6 मार्च 2015

बिज़नेस सेंटर

ग्लोबल होती दुनिया के लिए बिज़नेस का स्कोप बढ़ता जा रहा है। हर जगह  यह स्कोप रफ्तार में है। गांव लेकर शहर, शहर से लेकर महानगर में बिज़नेस आमदनी का मुख्य जरिया बन गया है। खासकर, युवा इसके माध्यम से दुनिया में अपना परचम लहराना चाहते हैं। ऐसा इसलिए संभव है कि इसके माध्यम से आप मेहनत और बुद्धिमानी से वह सब ई'छा पूरी कर सकते हैं, जिसकी चाहत आप रखते हैं। स्थिति ऐसी हो तो आप मानकर चलिए कि इस प्रकार की चाहत और बिज़नेस स्कोप को बढ़ाने के लिए बिज़नेस सेंटर का कॉन्सेप्ट रियल एस्टेट मार्केट को एक नई ऊंचाई प्रदान कर सकता है। देश के प्रसिद्ध स्थानों में बिज़नेस सेंटर के निर्माण को लेकर सभी प्रसिद्ध डेवलपर्स नए-नए कॉन्सेप्ट और प्लानिंग लेकर आ रहे हैं।  देश के विकास में स्मॉल इंडस्ट्रीज महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, इस बात को अब बड़े डेवलपर्स भी मान रहे हैं। आने वाले समय में अर्थव्यवस्था और कारोबार को नई दिशा देने में स्मॉल इंडस्ट्रीज की बड़ी भूमिका होगी। कारोबार बढऩे के साथ छोटे उद्यमियों को व्यापारिक योजनाएं बनाने और भविष्य के विकास का ताना बाना बुनने के लिए बिजनेस सेंटरों की ज़रूरत होगी। इस बात को ध्यान में रखते हुए अब बड़े खिलाड़ी छोटों के लिए बिज़नेस सेंटर खोलने में जुट गए हैं, जिसका अ'छा परिणाम भी मिल रहा है।
 ज़रूरत 
कुछ सालों में इस इंडस्ट्री की ग्रोथ रेट करीब 30 प्रतिशत के दर से हो रहा है। रियल एस्टेट सेक्टर में 80 प्रतिशत करीब रेजीडेंशियल और बाकि में कॉमर्शियल स्पेस जैसे ऑफिस, शॉपिंग मॉल्स, होटल्स और हॉस्पिटल के निर्माण का डेवलपमेंट हो रहा  है। इस क्षेत्र में जो अतुलनीय रूप से ग्रोथ देखा जा रहा है, इसमें भारतीय इकॉनमी के विकास का महत्वपूर्ण योगदान है। देश के प्रसिद्ध स्थान पर कॉमशर््िायल प्रोजेक्ट की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में भारतीय शहरों में  रिडेवलपमेंट की दिशा में डेवलपर्स के लिए सम्भावनाओं की कोई कमी नहीं है। जहां भारत में हो रहा शहरीकरण दुनिया भर के निवेशकों को मुनाफा कमाने का सुनहरा अवसर प्रतीत हो रहा है, वहीं इसकी वजह से बढ़ रही ज़रूरतों को पूरा करना भी एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है। वर्तमान में बाजार चौकस है और इसकी ऐसी भावनाएं इस मामले में बिज़नेस सेंटर में भी कम स्कोप नहीं दिख रहा है, क्योंकि जिस प्रकार से बिज़नेस सेक्टर के कुछ आयाम जैसे आईटी सेक्टर ग्रोथ कर रहा है और बाहरी लोग हायर किए जा रहे हैं, इससे आने वाले समय में बिज़नेस सेंटर कल्चर कुलांचे भर सकता है। खासकर, महानगरों में यह ट्रेंड जोर पकड़ चुका है, अब तो महानगरों से सटे इलाके में भी यह कॉन्सेप्ट खूब फलने-फूलने लगा है। इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण बात यह भी है कि जैसे-जैसे रोजगार के नए अवसर और नए ठिकाने बनते रहेंगे, उसी तरह से यह कॉन्सेप्ट भी उन्नति करता रहेगा। भले ही कॉमर्शियल निर्माण के बारे में यह कहा जा रहा हो कि इसके निर्माण की लागत भी कई स्थानों डेवलपर्स की नहीं निकल पा रही हो, लेकिन इस सेगमेंट में उत्तरोतर वृद्धि होने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है। अब कॉमर्शियल सेक्टर की दुनिया भी काफी बदल रही है। इसके निर्माण में 2 इन 1 का कॉन्सेप्ट आ चुका है। यानि की बिज़नेस सेंटर कम होम। यह कॉन्सेप्ट काफी जोर पकड़ चुका है और आने वाले समय में इसका जलवा कायम होने की उम्मीद व्यक्त की जा रही है। जिस प्रकार से सरकार ने एफडीआई को मंजूरी से रियल्टी सेक्टर को लाभ मिलेगा। इसके बारे में  पिछले कुछ वर्षों पर नज़र डालें तो खास तौर से आर्थिक मंदी के बाद कॉमर्शियल स्पेस की डिमांड बड़े पैमाने पर प्रभावित हुई है। रिटेल स्पेस का हाल तो और भी बुरा है। ऐसे में रिटेल क्षेत्र में एफडीआइ को मंजूरी मिलने से यह तो तय है कि कॉमर्शियल व रिटेल स्पेस की डिमांड को बढ़ावा मिलेगा। विदेशी कंपनियों के आने से रिटेल स्पेस की डिमांड में तेज़ी आना तो तय कहा जा सकता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि देश में करीब 12 बिलियन डॉलर का रियल एस्टेट इंडस्ट्री है। अध्ययनों के अनुसार कुछ सालों में इस इंडस्ट्री की ग्रोथ रेट करीब 30 प्रतिशत के दर से हो रहा है। यहां पर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस प्रकार से सरकार ने 100 स्मार्ट सिटीज के कॉन्सेप्ट को लेकर गंभीर है, इससे साबित होता है कि आने वाले समय में इस प्रकार के विकसित स्मार्ट सिटीज में बिज़नेस सेंटर की मांग जोर पर होगी। इसके पीछे कारण यह है कि बिज़नेस सेंटर वर्तमान और भविष्य दोनों की ज़रूरत बनने जा रहा है।

सोमवार, 16 फ़रवरी 2015

समय का चक्र

मुकेश कुमार झा+++++++++++++


समय का चक्र ऐसा चलता है कि आपके लाख कोशिश करने के बावजूद भी वह नहीं मिल पाता है जो आप चाहते हैं। शायद इस चक्र को ही भाग्य की नियति मान लिया जाता है। यह अवधारणा कर्मवाद के सिद्धांत से काफी अलग होता है, इसलिए तुलसीदास जी ने रामायण में कहा कि ' होई है सोई जो राम रचि राखाÓ।  कहीं न कहीं यह कथन भाग्यवादी होने का सबूत देता है। लेकिन कहते हैं न---यदि हर इंसान को अपनी सोच और समझ के हिसाब से सब कुछ मिल जाय तो फिर दुनिया-दारी का क्या होगा। इसी दुनिया-दारी का एक भाग है- मिस्टर अशोक। अशोक बचपन से ही कर्म में आस्था रखता था। उसके  लिए गीता का उपदेश 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचनÓ (कर्म पर तेरा अधिकार है फल पर नहीं )में ही जि़न्दगी का सार नज़र आता। साधारण घर का होने के कारण उसे पता था कि मेहनत से ही मुकाम बनाया जा सकता है और आगे बढऩे के लिए इसके सिवाय कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है। लगन और मेहनत को आत्मसात कर उसने अपनी जि़न्दगी के फलसफे बना लिया।  अपने आप में सीमित रहने वाला अशोक वक्त के साथ कदमताल करने के लिए अपनी पढ़ाई पर खूब मेहनत करता था। कई सालों के बाद उसका मेहनत रंग लाया। मेहनत ने ही उसे एक बेहतर मुकाम दिलाया। उस मुकाम पर पहुंचकर वह संतुष्टï रहने लगा। उसे सरकारी नौकरी मिल गई। लेकिन वक्त के साथ रफ्तार में बने रहने के लिए वह संघर्ष ही कर रहा था। इस संघर्ष में इसे मजा भी आ रहा था। कहावत है, यदि आपके जीवन में आगे बढऩे के लिए संघर्ष न हो तो जि़दगी का मजा नहीं रह जाता। वह भी इसी सिद्धंात को आदर्श  मानकर जि़दगी के ऊबर-खाबर रास्ते पर चल पड़ा था।  लेकिन रह-रह कर उसे पुरानी दिनों की बात याद आती थी। जब गांव के पाठशाला में गुरूजी आदर्शवाद और सिद्धांत से बच्चों को प्रेरित करने के लिए नीति-उपदेश के पोथी पढ़ाते थे। इस किताब में ज्यादातर पंचतंत्र और हितोपदेश के साथ अन्य सत्यनिष्ठïा और चरित्रवान व्यक्तियों का जीवन चरित होता था। लेकिल जब वह इन सभी बातों की तुलना बदलते वक्त के साथ करता तो वह समाज में चल रहे परिवर्तन को देखकर असहज हो जाता। उसे गुरूजी की कही हर एक अच्छी बात वक्त के थपेड़ों से टूटकर बिखर जाने जैसा लगता। मां-बाबूजी की उम्मीदों पर खरे उतरने के लिए अशोक ने  कभी अपनी वसूलो और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।  खैर- अशोक जानता था कि यह रोज की दिमागी खुराक की सोच है, जो बचपन में घूटी के रूप में पिलाई गई है। अशोक ये सारी बातों को सोच ही रहा था कि घड़ी की अलार्म ने उसकी तंद्रा भंग कर दी। वह तुरन्त ऑफिस जाने
के लिए तैयार होने लगा। वह तैयार होकर बस स्टॉप पर चल पड़ा था। बस स्टॉप पर प्रत्येक दिन की भांति चहल- पहल थी। कुछ देर के बाद एक बस आई, फिर क्या था, बस में चढऩे के लिए आपाधापी का माहौल बन गया। सब को जल्दी थी, सभी चाहते थे कि  बस में किसी प्रकार से सीट मिल जाए लेकिन न तो सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती थी और न यात्रियों की संख्या घटायी जा सकती थी। खैर- किसी प्रकार से अशोक बस में चढऩे में कामयाब रहा। बस भी वायुयान की भांति सड़क पर कुछ देर के बाद फर्राटे भरने लगी। करीब एक घंटे के बाद बस उसको ऑफिस के सामने वाली स्टॉप पर उतार दिया। बस दस मिनट की दूरी पर उसका ऑफिस था। वह करीब दस मिनट के बाद ऑफिस में नियत समय पर हाजिरी वाली रजिस्टर्ड में अपना नाम दर्ज कर चुका था। वह जिस डिपार्टमेंट में काम करता था, उसके बारे में एक बात काफी मशहूर थी कि देश में सबसे ज्यादा मलाई आप यहां से ही काट सकते हैं। उसे नौकरी कुछ दिन बीत जाने के बाद यह धीरे-धीरे पता होने लगा था कि क्यों लोग इस डिपार्टमेंट को मलाईदार बताते हैं। कुल मिलाकर यह सरकारी दफ्तर भ्रष्टïाचार का अड्डïा था। कभी-कभी तो छोटा-मोटा काम को करवाने के लिए उसके पास भी गिफ्ट का पैकेज आने लगा लेकिन अशोक के अंतरआत्मा ने इसे कभी भी स्वीकार नहीं किया। ईमानदारी के कारण अशोक आज इन बुलंदियों को नहीं छू पाया था, जहां बाकी उसके कुलीग पहुंच चुके थे। उसके कुलीग कार, बंगला और हाइ-फाई लाइफ स्टाइल का भाग बन चुके थे।  अशोक अभी भी बदलने को तैयार नहीं था। ऑफिसों में लोग-बाग इसको अलग मिट्टïी से बने हुए इंसान कहते। कुछ दिन के बाद ऑफिस में एक सज्जन अधिकारी आए। देखने से एकदम संभ्रांत और उच्च कुल के लग रहे थे।  वह बात बनाने के फन में माहिर थे और ऊपर के अधिकारी के चमचागिरी में अव्वल दर्जे के थे। सच में देखा जाय तो चमचागिरी में कोई पदक होता तो हर बार के प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक उनकी झोली में होती। इन सारी खूबियों के कारण महाशय बातों ही बातों में किसी को फांस लेते थे। उनकी महिमा को देखकर अशोक समझ चुका था कि यह एक नंबर का पहुंचा हुआ चीज़ है और उसकी सेटिंग यहां नहीं, ऊपर तक है।  फिर तो दरवार रोज़ 

सजने लगी।  इनके महफील में चमचा रूपी जीव चार चांद लगाने लगे। कुल मिलाकर यह ऑफिस नहीं, चमचों का अड्डïा था। कुछ दिन के बाद ऑफिस में एक घटना घटी।  कुछ महत्वपूर्ण फाइलों की चोरी हो गई। इस फाइल का डाटा रिकॉर्ड कम्प्युटर पर भी नहीं था। इस घटना में साजिश की बू आने लगी।  इस फाइल का रिकॉर्ड मिस्टर राजू के पास ही रहता था। उसे पता था कि यह फाइल कितना महत्वपूर्ण है। इस फाइल में कई महत्वपूर्ण कंपनियों के वित्तिय रिपोर्ट थी। कुल मिलाकर टैक्स के मामले में चोरी करने वालों का रिकॉर्ड था।  भाई, जब ऑफिस में ऐसे-ऐसे महारथी हों तो कुछ भी संभव था।  अशोक को जब इस बात का पता चला तो वह समझ गया कि यह किसकी करतूत हो सकती है। पूरी बात की जिम्मेदारी बेचारे राजू पर थौंप दिया गया। राजू को पता था कि यदि वह समझौता वाली नीति अपनाता है तो पूरे जांच-पड़ताल का ऐसा दौड़ चलेगा कि फाइल का मामला फाइल में ही दबकर रह जाएगी। लेकिन इंसानियत भी कोई चीज़ होती है। इस बार अन्य बार की तरह राजू ने समझौता की नीति को मानने से इनकार कर दिया।  यह बात ऑफिस में जंगल में आग की तरह फैल गई कि राजू ने क्रांति कर दिया है।  उसे सत्य और निष्ठïा की बीमारी लग गई है। फिर होना क्या था, एक से बढ़कर एक चोर, उसे दुनिया-दारी समझाने लगे। अंत में अधिकारियों की जमात भी पहुंची, जिसमें नए-नए बहाल हुए बगुला भगत भी धर्म और  अध्यात्म के  सहारे राजू को बहुत समझाने का प्रयास किया लेकिन सब व्यर्थ। राजू पर इन सारी बातों का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। वह अपने सिद्धांत पर अंत तक अटल रहा। राजू, सिर्फ और सिर्फ अशोक को ही ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठï मानता था। बाकी सबको वह भलीभांति जानता था लेकिन ऑफिस में कुछ लोग थे, जो राजू के इस निर्णय को ऊपर से समर्थन नहीं कर रहे थे लेकिन कहीं न कहीं मन ही मन राजू की बात को स्वीकार कर चुके थे। उसने ऑफिस के इतिहास को अशोक सामने उड़ेल दिया। लेकिन अशोक भी कुछ नहीं कर सकता था। 
राजू इस बात को भलीभांति जानता था। 
कुछ दिनों के बाद राजू के खिलाफ,ऑफिस में  तिकड़म का ऐसा चाल चला गया कि वह दिन-प्रतिदिन फंसता ही चला गया।  बेचारे ने ऊपर तक बात पहुंचाने की भरपूर कोशिश की लेकिन उसे आश्वासनों के सिवाय कुछ हाथ नहीं लगा। वह एक प्रकार से भंबर जाल में फंस चुका था, जहां से निकालना मुश्किल ही नहीं, असंभव था। वह मानसिक अवसाद से ग्रसित रहने लगा। आखिर कब तक अकेला दुनिया से जंग लड़ता। वह कुछ दिनों के बाद तंग आकर खुदकुशी कर ली। इस आकस्मिक मौत को कितनों ने जश्न के रूप में मनाया तो कितनों ने राजू के बेवकुफी से भरा कदम बताया। लेकिन उस दिन के बाद से ऑफिस का वातावरण में खास प्रकार की मायूसी सी छा गयी। वहां का मंजर अपने-अपने आप बदलने लगा। पूरा का पूरा ऑफिस में अब मातम पसरा हुआ नज़र आने लगा। ऑफिस में रोज कुछ न कुछ अनहोनी घटनाएं होने लगी। 
यहां पर रहने वाले सिक्युरिटी गार्ड रामदीन ऑफिस के बदलते माहौल से बेफ्रिक होकर रात में सोने के क्रम में ही था। तभी अचानक जोर से हवा चली। पूरा का पूरा वातवरण काली स्याह के बादलों में लिपटा हुआ नज़र आने लगा। सन्नाटे को चिरती हुई आवाज़ भी उसके कानों में स्पष्टï सुनाई देने लगी। यह आवाज़ काफी डरावनी थी। हंसी और रोने के सम्मिलत स्वर ने पूरे इलाके को झकझोंर कर रख दिया।  उसने एक काली स्याह छाया को ऑफिस में जाते हुए देखा। वह कुछ देर के बाद ऑफिस के खिड़की से झांक कर देखा तो उसके होश उड़ गए। ऑफिस में राजू को बड़े मजे से कुर्सी पर बैठा और उसने इधर-उधर नज़र दौडा़ई, मानों कोई चीज़ को ढूंढ रहा हो। कुछ देर खामोश बैठने के बाद, उसने एक विचित्र हंसी, हंसी। यह हंसी इतना असामान्य था कि सुनकर किसी का भी रूह कांप सकता था। उस विचित्र हंसी के बाद ऑफिस का वातावरण अपने आप बदलने लगा। पूरा का पूरा ऑफिस काली चादर में लिपटी हुयी नज़र आने लगी। चारों तरफ धुंआ फैल गया। माहौल संगीन हो चला था। कुछ देर बाद ऑफिस से कोई चीज़ टूटने की आवाज़ जोर-जोर से आने लगी। 
रामदीन उत्सुकता से ऑफिस के बांयी ओर वाली खिड़की को थोड़ा और सरका देखा तो उसके होश फख्ता हो गए। ऑफिस का पूरा समान हवा में तैर रहा था। टेबल और कुर्सी आसमान में हिचकोले भर रहा था। कम्प्यूटर से धुंआ उठने लगा था, जैसे पूरे कम्प्यूटर में शॉट-सर्किट हो गया हो। यह पूरा दृश्य देखकर रामदीन डर से कांपने लगा। राजू ने ऑफिस में कोई भी समान को सुरक्षित नहीं रहने दिया। एक -एक कर उसने सब कुछ नष्टï कर दिया। उसके बाद राजू ने भयंकर हंसी हवा में उड़ेल दी। उसकी हंसी वातावरण में विष घोलने लगी थी और रामदीन का माथा चक्करघन्नी की तरह घूमने लगा। कुछ देर बाद उसे लगा कि उसका दिमाग अनंत गहराइयों में खोता जा रहा है। सुबह होने पर जब चपरासी ने ऑफिस का मैन गेट खोला तो वह अंदर के दृश्य को देखकर चौंक गया। सब-कुछ तहस-नहस हो चुका था। वह जब इधर-उधर नज़र दौड़ाई तो उसने खिड़की के सामने  रामदीन को बेहोश पाया। उसने तुरन्त नल से पानी लाकर उसके चेहरे पर छिटें मारे और कुछ देर के बाद रामदीन होश में आया। 11 बजते -बजते ऑफिस में सारे लोग आ चुके थे। रामदीन ने रात वाली घटना क्रम को बताया तो सबके होश उड़ गए। सभी लोगों को यह बात समझते देर न लगी कि राजू की आत्मा बदले की आग में जलकर ऐसा कर रहा है। उसके बाद तो जो राजू के फंसाने के दुश्चक्र में जो शामिल थे, सभी की पांव तले ज़मीन खिसक गई। यहां पर दिन भर सिर्फ और सिर्फ राजू की आत्मा की बात होती रही। सब बात करने में मशगूल थे कि तभी खबर आई कि ऑफिस का एक साथी कार एक्सिडेंट में मरा जा चुका है। यह एक्सिडेंट में मारे गए व्यक्ति का राजू के मामले में काफी गहरे ताल्लुकात थे। रिपोर्ट के अनुसार, उसकी मौत, स्पीड ड्राइविंग का नतीजा माना गया लेकिन सचाई  यह थी कि राजू ने बदला लेते हुए 

उसे दर्दनाक मौत दी थी। उसका चेहरा इस कदर बिगड़ चुका था कि लोगों के पहचान में नहीं आ रहा था। कार के ऊपर खरोंच तक नहीं आई थी। यह मामला रहस्यमयी सा लगता था। ऑफिस की दुदर्शा को देखकर वरिष्ठï अधिकारियों के आने के बाद एक मीटिंग बुलाई गई। मीङ्क्षटग में कुछ लोगों के चेहरे पर मौत की रेखा स्पष्टï नज़र आ रही थी। सर्वप्रथम इस मीटिंग में दोनों सिक्युरिटी गार्ड रामदीन से पूछा गया कि तुम रात में यहां नहीं थे। उसने एक सांस में रात की पूरी घटना सुना दी। इसे सुनने के बाद सभी के रौंगटे खड़े हो गए। लोगों को समझ में आ चुका था कि इस मौत का जिम्मेदार कौन है। दिन -प्रतिदिन यहां का माहौल काफी डरावना होता जा रहा था। राजू की आत्मा इन लोगों को चुन-चुन कर मारने लगा जो उसे अकाल मौत की तरफ ले गया था। रोज ही किसी न किसी की मौत की खबर आने लगी। इन लोगों की मौत विभत्स रूप में हो रही थी। रोज कोई न कोई रहस्यमयी रूप से कोई घर से लापता हो जाता या कोई घर लौट कर ही नहीं आ पाता। एक दिन दोपहर का समय था। ऑफिस के सभी कर्मचारी लंच कर रहे थे कि तभी अचानक ऑफिस से चीखने की आवाज़ आई। सभी आवाज़ की तरफ भागे। सामने देखा तो सबके होश फख्ता हो गए। अनिष्का बेहोश की हालत में ऑफिस के फर्श पर पड़ी हुई मिली। उसे किसी प्रकार से यहां से उठाकर केबिन में लाया गया। पानी के छिंटे चेहरे पर मारे गए । कुछ देर के बाद उसे होश आया। उसने कहा कि यह ऑफिस राजू के भटकती आत्मा का सैरगाह बन चुका है। मैं जब बाथरूम में जा रही थी । अचानक आइने के सामने एक विभत्स चेहरा देखा। यह चेहरा धीरे-धीरे परिवर्तित होकर राजू का रूप ले लिया। नल से अपने आप पानी के बदले खून आने लगा। मैं जब दूसरे बाथरूम में गईं तो वहां भी वही हालात थे। मैैं दौड़कर भागी कि सामने राजू को चेहरा और डरावना और विकृत हो गया, जिसको देखकर में बेहोश हो गई। इतना बोलते ही फिर से ऑफिस का वातावरण परिवर्तित होने लगा। यहां का वातावरण काफी डरावना हो चुका था। राजू के हंसने की आवाज़ स्पष्टï सुनी जा सकती थी। सबके कानों में उसकी आवाज़ विष घोलने लगी। डर के मारे सबके हालात बुरे हो चुके थे। एक-एक कर सभी भागने लगे लेकिन मुख्य द्वार बंद हो चुका था। सबकी सांसे डर के मारे एक प्रकार से रूक चुकी थी। सभी को लगने लगा कि अब प्राण नहीं बचेंगे, तभी अचानक अशोक ने मुख्य द्वार पर दस्तक दी। उसके हाथ लगते ही मुख्य द्वार अपने आप खुल गया। लोग जान बचाकर भागे। उस दिन के बाद इस ऑफिस में कोर्ई भुलकर कदम नहीं रखा। जो भी उसके आस-पास जाने का दु:साहस किया, बचकर नहीं लौटा। भ्रष्टïाचारियों का यह अड्डïा अब हॉन्टिड प्लैस में बदल चुका था। कुछ दिनों के बाद अशोक ने यहां से ट्रांसफर करा ली। नया स्थान पर जाने के बाद अशोक अपने मेहनत और लगन से जल्दी ही वरिष्ठï अधिकारी बन गया। वह अपने सिद्धांतों और आदर्शों के कारण पूरे देश में प्रसिद्ध हो गया। अपने सत्यनिष्ठïा और कर्तव्यपराणयता के कारण कुछ महीनों के बाद उसे राष्टपति ने पुरस्कार भी मिला। लेकिन उसे अभी तक राजू की शहादत याद है और उसका बदला भी। 

बुधवार, 21 जनवरी 2015

यह भी जाने

 होम लोन के साथ भी कुछ ऐसे खर्च जुड़े होते जिसे समझना ज़रूरी  हैं। बेहतर होगा कि लोन की डील फाइनल करने से पहले इन खर्चों पर बारीक निगाह डाल ली जाए -होम लोन लेते वक्त केवल इंटरेस्ट रेट्स को ही दिमाग में नहीं रखना चाहिए, बल्कि इससे जुड़ी कई अन्य खर्चों पर भी नज़र डाल लेनी चाहिए। लोन लेने से पहले भी भरपूर होमवर्क करने की जरूरत होती है। सबसे पहले विभिन्न फाइनैंसर्स के लोन ऑफर्स की तुलना करें। साथ ही लोन से जुड़े अन्य चार्जेज और पेनल्टीज पर भी नज़र डाल लें। कई बार फिक्स्ड रेट फ्लोटिंग रेट के बराबर या ज्यादा हो जाते हैं, इसलिए लोन अग्रीमेंट करते वक्त इस बात का ख्याल रखें कि बैंक फिक्स्ड रेट को रिवाइज किए जाने जैसी शर्तें तो नहीं रख रहा है। 


आइए, डालते हैं होम लोन से जुड़े कुछ खर्चों पर एक नजर-
एप्लिकेशन फीस-
लोन देने वाली कंपनियां आमतौर पर लोन ऐप्लिकेशन के साथ फीस चार्ज करती हैं। यह छोटा.सा अमाउंट होता है, जो आमतौर पर नॉन रिफंडेबल होता है।
प्रोसेसिंग फीस-
इसमें डॉक्युमेंट वेरीफिकेशन, क्रेडिट क्षमता, प्रॉपर्टी की जांच और पहले लिए गए लोन्स आदि से जुड़ी इन्फॉर्मेशन कलेक्ट करने के लिए फीस चार्ज की जाती है। इस काम के लिए हर लोन कंपनी के पास लीगल एक्सपर्ट्स, फाइनैंस एक्सपर्ट्स सहित एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ की पूरी टीम होती है।
अप्राप्त धन पर ब्याज-
लोन की पूरी रकम कोई भी बैंक एक साथ नहीं देता। यह रकम किस्तों में दी जाती है। अक्सर ब्याज केवल दिए गए धन पर ही लगता है, लेकिन कुछ बैंक पूरे अमाउंट पर भी ब्याज चार्ज करते हैं। अगर आप बिना मिले धन पर ब्याज न देना चाहें, तो इस बात के बारे में बैंक से पहले ही पता कर लें।
प्री  पेमेंट पेनल्टी-घर से हर व्यक्ति का भावनात्मक रिश्ता होता है। इसी वजह से ज्यादातर लोग अपना होम लोन जल्द से जल्द चुका देना चाहते हैं। यदि उन्हें कहीं से बड़े अमाउंट में पैसा मिलता है, तो वे अपने लोन्स चुकाने को वरीयता देते हैं। एकमुश्त भुगतान से बैंक को मिलने वाले ब्याज का नुकसान होता है, इसलिए ज्यादातर बैंक इस पर पेनल्टी चार्ज करते हैं। इसे प्री . पेमेंट पेनल्टी कहते हैं।
फिक्स्ड रेट्स-
इस उम्मीद के साथ कि इंटरेस्ट रेट्स नहीं बढ़ेंगे, अमूमन लोग फिक्स्ड रेट्स पर ही होम लोन लेना पसंद करते हैं। फिक्स्ड रेट्स आमतौर पर फ्लोटिंग रेट्स से ज्यादा  होते हैं। फिक्स्ड रेट पर लोन लेने वाले तमाम लोगों की लोन रेट रिवाइज किए जाने की शिकायत रहती है। इससे कई बार फिक्स्ड रेट फ्लोटिंग रेट के बराबर या 'ज्यादा  हो जाते हैं, इसलिए लोन अग्रीमेंट करते वक्त इस बात का ख्याल रखें कि बैंक फिक्स्ड रेट को रिवाइज किए जाने जैसी शर्तें तो नहीं रख रहा है।
अन्य फीस-
कुछ बैंक लीगल फीस और टेक्निकल फीस जैसे चार्जेज भी कस्टमर पर लगाते हैं। कुछ बैंक रजिस्ट्रेशन फी और स्टाम्प ड्यूटी कस्टमर पर ही चार्ज करती हैं। इनके अलावा मेंटेनेंस, फर्निशिंग और वुड वर्क्स, प्रॉपर्टी टैक्स और असोसिएशन फी आदि ऐसे तमाम खर्चे भी जरूरी हैं, इसलिए अपने बजट को दिमाग में रखकर ही लोन के लिए अप्लाई करें।

मंगलवार, 13 जनवरी 2015

बदल रहा है इंडिया !

देश की आबादी प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और अधिकांश आबादी शहरों की ओर पलायन हो रही है। एक्सपर्ट के अनुसार 2050 तक विश्व का शहरी जनसंख्या दोगुनी हो जाएगी। इसका सीधा मतलब है कि इन जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए प्रत्येक साल 7 नई दिल्ली जैसी सिटी बसानी होगी। शहरी इलाके की आबादी का देश की जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान है। वर्तमान समय में देश में पूरी आबादी का करीब 31 प्रतिशत शहरों में रह रही है। ये आबादी देश की पूरी जीडीपी में 60 प्रतिशत का हिस्सेदारी रखते हैं। अनुमान है कि आने वाले 15 वर्षों में अर्बन इंडिया देश की जीडीपी में करीब 75 प्रतिशत का महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
देश के विकास दर को रफ्तार देने में अर्बन सिटीज एक इंजन के रूप में है, जो हमारी दिशा और दशा दोनों को निर्धारित करती है। इस जनसंख्या को भविष्य में और भी बड़े स्तर पर कई स्मार्ट सिटीज की ज़रूरत होगी, जो बढ़ती आबादी को एक बेहतर सामंजस्य प्रदान करेगी। यहां पर स्मार्ट सिटीज का कॉन्सेप्ट ऐसा होगा, जो कई प्रकार की जटिलतारओं को खत्म करेगा। यह सिटीज जहां कार्य करने की क्षमता और दक्षता को बढ़ावा देगा, वहीं खर्च कम करने के साथ-साथ जीवन की गुणवत्ता को भी बढ़ाएगा। एक स्मार्ट सिटी में प्रतिस्पर्शा, पूंजी और स्थिरता जैसी प्रमुख प्रमुख विशेषताएं होंगी। आप स्मार्ट सिटीज के कॉन्सेप्ट को कुछ इस प्रकार से समझ सकते हैं कि एक साधारण मोबाइल फोन और स्मार्ट फोन के बीच क्या अंतर है। देखा जाय तो इन दोनों के बीच क्वालिटी और फीचर्स का अंतर है। यह क्वालिटी और फीचर्स स्मार्ट सिटीज के कॉन्सेप्ट को काफी हद तक परिभाषित कर सकती है। हाल में एक सम्मेलन में केंद्रीय शहरी मंत्री वैंकया नायडू ने स्मार्ट सिटीज के बारे में कहा कि स्मार्ट नेता और लोग ही स्मार्ट सिटी का निर्माण कर सकते हैं।   स्मार्ट सिटी के निर्माण के लिए स्मार्ट नेतृत्व और काबिल लोग पहली ज़रूरत हैं। देश में शहरी प्रशासन की स्थिति और शहरी जीवन को उच्चस्तरीय बनाने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा भी की। उन्होंने कहा कि प्रभावशाली शहरी प्रशासन के लिए ऐसे होनहार नेतृत्व की आवश्यकता होती है जो साहसी, पहल करने वाला, तत्पर और ज़रूरत पडऩे पर कड़े फैसले लेने वाला, प्रशासन में सुधार लाने वाला, अवैध निर्माण और अवैध कब्ज़ों को रोकने वाला और माफिया पर कार्रवाई करने वाला हो। होनहार लोगों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि लोगों को सचेत, प्रश्न पूछने वाले, सेवाओं का दाम चुकाने वाले, साथी नागरिकों को नियमों का उल्लंघन करने से रोकने वाले और अपना हक मांगने वाला होना चाहिए। इन सभी बातों को ध्यान में रखने के बाद ही स्मार्ट सिटी बनाने का कार्य पूरा हो सकेगा।  वेंकैया नायडू ने स्मार्ट सिटी की व्याख्या करते हुए कहा कि स्मार्ट सिटी ऐसी सिटी को कहा जा सकता है, जहां शहरी जीवन आरामदायक हो, अच्छे प्रशासन से जीवनस्तर बेहतर बन गया हो, कुशल चिकित्सा व शिक्षा सेवाएं हों, बिजली-पानी की आपूर्ति चौबीसों घंटे हो, यातायात के अच्छे साधन हों, उच्चस्तरीय सफाई व्यवस्था हो, जरूरतमंदों को रोजगार मिल सके, सुदृढ़ साइबर संपर्क-सुविधाएं हों, जिनका लाभ आय, उम्र या लिंगभेद के भेदभाव के बिना सभी को मिल सके। मुख्य लक्ष्य तो समृद्ध, स्वस्थ और खुशहाल शहरों का निर्माण करना है। मंत्री महोदय ने कहा कि प्रभावशाली शहरी प्रशासन को प्राकृतिक संसाधनों का मितव्ययता से इस्तेमाल करने, कम से कम कचरा पैदा करने, चीजों के दोबारा इस्तेमाल, जल संचयन और ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल का लक्ष्य रखना चाहिए।

शहरी हकीकत और स्मार्ट सिटीज की ज़रूरत
देश के शहरीकरण के बारे में कहा जा रहा है कि वर्तमान समय में 377 मिलियन लोग (31 प्रतिशत) देश के शहरी क्षेत्रों में रह रहे हैं। अगले 15 सालों में, इसमें 157 मिलियन की संख्या और जुड़ जाएगी। 2050 तक शहरों में रहने वालों की संख्या 500 मिलियन हो जाएगी। तब पहली बार, देश की आधी जनसंख्या शहरी क्षेत्रों में निवास कर रही होगी। शहरों में रहने वाले 70 प्रतिशत लोग जिनकी संख्या एक लाख से अधिक है, 468 शहरों/ कस्बों में रहते हैं।  शहरीकरण और आर्थिक विकास आपस में जुड़े हुए हैं इसलिए बढ़ते शहरीकरण में आर्थिक विकास का इंजन बनने की अपार संभावनाएं हैं। इस बात के समर्थन में श्री नायडू ने कहा कि हालांकि केवल 31 प्रतिशत जनता ही शहरों में निवास करती है पर वे देश के जीडीपी में 60 प्रतिशत का योगदान देते हैं। इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री ने 100 स्मार्ट शहर बनाने और बाकी शहरों और कस्बों में सुविधाओं में सुधार करने का सुझाव दिया है।
स्मार्ट सिटी के पहल पर राज्यों के सुझाव 

स्मार्ट सिटी पहल का सर्वसम्मति से स्वागत करते हुए राज्यों ने दस व्यापक सुझाव रखे हैं। क्रियान्वयन में लचीला रुख अपनाने व क्षमता निर्माण, परियोजना की रिपोर्ट बनाने में तकनीकी सहायता और उच्च वित्तीय सहायता आदि इनमें शामिल हैं। अधिकारियों से राज्यों के सुझावों की विस्तार से जांच-पड़ताल करने और आगामी अंतर-मंत्रालय बैठक में विचार-विमर्श के लिए एक प्रस्ताव। वित्त और रक्षा, राजमार्ग और सड़क यातायात, रेलवे, बिजली, पर्यावरण और वन मंत्रियों से सहयोग। स्मार्ट सिटी परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर राज्यों से निम्न सुझाव प्राप्त हुए हैं।

1.क्रियान्वयन में लचीलापन
2. प्रदर्शन को प्रोत्साहन
3. तकनीकी अपनाने के लिए क्षमता निर्माण
4. स्थानीय शहरी निकायों में संसाधनों की कमी को देखते हुए अधिक केंद्रीय सहायता
5. भारत सरकार द्वारा मंजूरी प्रक्रिया में तेजी
6. ठोस कचरा प्रबंधन और जलापूर्ति परियोजनाओं में आ रही धन की कमी का अधिक से अधिक प्रबंध
7. पूंजीगत व्यय केंद्र सरकार वहन करें क्योंकि निजी कंपनियों को मिलने वाले शुल्क से वे केवल परिचालन व रखरखाव का काम ही करेंगी
8. परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए विशेष उद्देश्य वाहन
9. संभाव्यता प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने का खर्च केंद्र को देना होगा
10. नई तकनीक के बारे में केंद्र को मार्गदर्शन करना होगा, क्योंकि यह राज्यों/केंद्र सरकारों के दायरे में नहीं आता। कुछ राज्यों ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी व्यवस्था को अपनाने से जुड़ी समस्याओं की ओर भी ध्यान दिलाया। यहां शहरी परियोजनाओं में उपयोगकर्ता शुल्क व अन्य जटिलताएं सामने आती हैं।

 फैक्ट शीट ऑफ स्मार्ट सिटी

 -चीन में टिनजियांग नॉलेज सिटी समेत सुहो, गोंजो, सिहॉन स्मार्ट सिटी हैं।
-अहमदाबाद एयरपोर्ट से 18 किलोमीटर की दूरी पर द गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंशियल टेक (गिफ्ट) सिटी मोदी के प्रोजेक्ट की पहली सिटी हो सकती है
-रिपोर्ट के अनुसार, 70 हजार करोड़ का ये प्रोजेक्ट 886 एकड़ में फैला होगा। 2011 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट को पूरा होने में 10 साल लगेंगे।
- इन प्रोजेक्ट्स के जरिए 5 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रुप से और 5 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रुप से रोजगार मिलने का वादा किया गया है।
-इन स्मार्ट सिटी में घरों से निकलने वाले कूड़े-कचड़े को पाइपलाइन के जरिए सीधे वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट तक पहुंचाया जाएगा। सिटी के अंदर ही रोज के काम को व्यवस्थित करने के लिए इनफॉर्मेशन और कम्युनिकेशन सेंटर भी बनाया जाएगा।
-2,500 स्मार्ट सिटी में काम करनेवाली आईबीएम के अनुसार, एक स्मार्ट सिटी के अंदर किए जानेवाले काम के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।

-बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में 100 स्मार्ट सिटी बनाने का वादा किया था। लेकिन इतनी स्मार्ट सिटी बनाने के लिए करीब 20 से 30 साल लग सकते हैं। इसीलिए सबसे पहले दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर पर 7 स्मार्ट सिटी बनाई जाएंगी।
- किसी भी स्मार्ट सिटी में सूचना तकनीक का बखूबी इस्तेमाल किया जाता है.सेंसर,कैमरे, वायरलैस उपकरणों, डाटा सेंटर बनाए जाते हैं। स्मार्ट सिटी को बनाते वक्त इसे इको फ्रेंडली भी बनाया जाता है। स्मार्ट सिटी में ऊर्जा बचाने के लिए भी पूरे इंतजाम किए जाते हैं।

डिमांड और सप्लाई के बीच खाई बढ़ती जा रही है

एनसीआर में नई आवास परियोजनाओं की संख्या को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इस साल  तक एनसीआर में तकरीबन 5 से 6 लाख नए फ्लैट तैयार होंगे। 2 से 3 साल में परियोजनाएं पूरी होते ही  प्रॉपर्टी की कीमत  बढ़ भी सकती हैं। यहां पर निर्माण की दुनिया भले ही रफ्तार में हो लेकिन  कीमत के मामले एंड यूजर्स को चौंका ज़रूर रहा है। यहां पर डिमांड और सप्लाई के बीच खाई बढ़ती जा रही है। ऐसी स्थिति में यहां पर डेवलपर्र्स को प्राइस करेक्शन का दौर जारी करना ज़रूरी है। सूत्रों का कहना है कि कई रियल एस्टेट कंपनियों के प्रोजेक्ट्स में कम ग्राहक रूचि दिखा रहे हैं।

यहां पर जहां डेवलपर्र्स को ऐसी स्थिति में प्रोजेक्ट्स पूरा करने के दवाब से दो-चार होना पड़ रहा है, वहीं उनका भविष्य की योजनाएं भी प्रभावित हो रही है। सही मायने में देखा जाय तो निकट भविष्य में इससे समस्याएं बढेंगी ही, घटेगी नहीं। इससे बचने का सबसे बेहतरीन तरीका है कि सभी डेवलपर्स मिलकर प्राइस को इस प्रकार से नियंत्रित करें कि उपभोक्ता की रूचि बढ़े। हालांकि यहां पर एक बात तो साफ है कि बढ़ती महंगाई के ग्राफ पर ही काफी हद तक कीमत की दुनिया को प्रभावित कर रखा है। इसे एक रणनीति के हिसाब से नियंत्रित करना शायद इतना आसान नहीं हो लेकिन कुछ बातें तो हकीकत के काफी करीब है, इसे समझ कर ऐसा करना ज़रूरी भी है। इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में यह स्थान नूतन काल में ढंग से नहीं आ पाया है। जब तक इसे व्यवस्थित नहीं किया जाता तब तक डेवलपर्स को कुछ खास तो सोचना ही होगा। यह बात तो दिगर है कि रियल एस्टेट में प्राइस करेक्शन, नए प्रोजेक्ट लॉन्च, कस्टमर इन्क्वायरी में बढ़ोतरी और सबसे बढ़कर अफोर्डेबल  हाउसिंग के मंत्र ने रियल एस्टेट मार्केट  को फिर उम्मीद दिखाई है। रियल एस्टेट सेक्टर भी यह समझ चुका है कि भारत में मध्यम वर्ग की संख्या सबसे ज्यादा है तो इसी पर फोकस करना पड़ेगा। कई सर्वे से यह बात साफ हो गया है कि रियल एस्टेट सेक्टर में अफोडेर्बल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की मांग लगातार बढ़ रही है। 

एक वास्तविकता यह भी है

रियल एस्टेट का मार्केट समय के साथ रफ्तार में तो है लेकिन एक वास्तविकता यह भी है कि घरों की ब्रिकी उम्मीद से कम हो रही है। देश के जाने-माने डेवलपर्स इस जुगत में लगे रहते हैं कि घरों की ब्रिकी में तेज़ी आए। लेकिन घरों की खरीद के मामले में आर्थिक पहलू जुड़े होते हैं। आम लोगों के पास जब तक ढंग का पैसा नहीं होगा, तब तक वे घर खरीदने के बारे में सोच भी नहीं सकते हैं। बढ़ती महंगाई के असर ने लोगों को बेदम कर रखा है। स्थिति आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपया वाली है।

जेब पर खाने-पीने से लेकर रहन-सहन भारी पडऩे लगे हैं। हालांकि उच्च मध्यम वर्ग वाले के पास निवेश करने के ऑप्शन भले ही मौजूद हो, लेकिन मध्यम व निम्र आय वर्ग वालों पर घर लेना या कहीं निवेश करना आसान नहीं होता है। जि़न्दगी भर की जमा-पूंजी घर में लगाना तभी संभव हो पाता है, जब उसे बैंक होम लोन की सुविधा प्रदान करता है। यह तो बैंक ही है, जो होम लोन देकर आपके आशियाने के सपने को साकार कर रहे हैं। स्थिति जब ऐसी हो तो प्रॉपर्टी मार्केट में कुछ न कुछ ऐसी व्यवस्था डेवलपर्स द्वारा प्रदान की जाती है, जो आपके घर लेने का सपना सकार हो सके। इसके लिए वह एक सशक्त माध्यम ऑफर या स्कीम को चुनते हैं। ऑफर या स्कीम का माध्यम भले ही सशक्त हो लेकिन इसके पीछे कई तर्कहोते हैं, जो सोच-समझ कर फायदा उठाने में ही भलाई है। देखा जाय तो रियल एस्टेट का बाज़ार में सुस्ती छाई होने के पीछे अर्थव्यवस्था में सुस्ती और कीमतों का आम आदमी की पहुंच से बाहर होना माना जाता है। यह हाल महानगर के रियल एस्टेट का ही नहीं, बल्किर टियर टू-थ्री शहरों में भी है। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, सरकार की कमजोर नीति और अर्थव्यस्था में मंदी की वजह से परेशान है। इसी कारण यह सेक्टर भी कमजोर दिखाई दे रहा है। डेवलपर्स रेजिडेंशल प्रॉपर्टी को समय पर पूरा नहीं कर पा रहे हैं और इसकी मुख्य वजह खराब प्रोजेक्ट मैनेजमेंट है। दूसरी वजह ऊंची महंगाई और बढ़ती निर्माण लागत है, इस कारण भी प्रोजेक्ट समय पर पूरा नहीं हो पा रहे हैं। अधिकतर डेवलपर्स नगदी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। उनके पास प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए पैसा नहीं है। एक प्रोजेक्ट का पैसा दूसरे प्रोजेक्ट में लगाकर अधिक मुनाफा कमाना चाहते हैं, जिसके कारण तय समय पर प्रोजेक्ट पूरा नहीं कर पाते हैं। रियल एस्टेट में रेगुलेटर नहीं होने से भी परियोजनाओं में देरी हो रही है।

अफोर्डेबल हाउसिंग

अफोर्डेबल  हाउसिंग की डिमांड कितनी?   
हाल ही में एक सर्वे के द्वारा यह बात सामने आई है कि 2020 तक भारत में करीब  40 मिलियन अफोर्डेबल  रेंज के मकान की ज़रूरत होगी। रियल एस्टेट जानकारों का मानना है कि जिस तेज़ी से आम आदमी के माली हालात में सुधार हो रहा है, उससे घर की मांग और बढ़ेगी और इस सेग्मेंट की घर की आपूर्ति न होने से डिमांड और सप्लाई का गैप और बढ़ेगा। इस समस्या को कैसे निपटा जाए इसके लिए न तो डेवलपर्स कुछ सोच रहे हैं और न ही सरकार। ऐसे में स्थिति और गंभीर होगा और रहने के लिए एकमात्र विकल्प झुग्गी-झोपड़ी ही होगा। इससे जहां स्वास्थ और सर्वभौमिक विकास में बाधा आएगी वहीं विकसित देश बनने का सपना भी पूरा संभवत: नहीं हो जाएगा।
समस्या का समाधान क्या है?
समस्या विकराल रूप अख्तियार कर ले उससे पहले इसका निदान ज़रूरी है। डेवलपर्स ज़मीन की बढ़ी हुई कीमत, रॉ-मैटीरियल और लेबर कॉस्ट का दुहाई दे कर सस्ते प्रोजेक्ट बनाने में असर्मथता जता रहे है। पर एक बात गौर करने वाली है कि आज जो भी टाउनशिप या प्रोजेक्ट डेवलप किए जा रहे है। उसमेें वल्र्ड क्लास की सुविधा उपलब्ध हो, इस पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है। पर आज भी हमारे देश में  50 फीसदी लोग ऐसे हैं, जिन्हें सिर्फ एक छत की ज़रूरत है, जिसमें वह रहकर ढंग से अपना रात गुजार सके। उनके लिए न तो जीम ,न ही गोल्फ कोर्स , न ही मॉड्यूलर किचन, न ही खास प्रकार के इंटीरियर, न ही पार्क और क्लब की ज़रूरत है। वातानुकूलित और 24 ऑवर पॉवर बैकअप तो दूर की बात है। ज़रूरत है तो बस एक छत और दो कमरे की, जिसमे वे अपना एक छोटा सा परिवार को रख सके। फिर ये डेवलपर्स तमाम तरह के सुविधाओं के ताम झाम से क्यों अनायास ज्यादा कीमत लोगों पर थोप रहे हैं।  यदि डेवलपर्स आज भी एक साधारण प्रोजेक्ट डेवलप करे तो वह बड़े ही आसानी से 15-25 लाख में हर किसी को उनके सपने का आशियाना उपलब्ध करा सकते हैं।  इस गंभीर मुद्दे पर सोचने की ज़रूरत है और समय रहते इसका निदान हो, जिससे सबका भला हो। ऐसा न हो कि समाज का एक तबका अपने को आसमान में बैठा पाए और दूसरा पताल में।

रविवार, 11 जनवरी 2015

स्पेस का उपयोग



Your Feedback is Valuable to Us.
Please write to journalist.iimc@gmail.com


Cell Number-9910046309

सौदर्यं और व्यक्तित्व की पहचान दरवाजा



Your Feedback is Valuable to Us.
Please write to journalist.iimc@gmail.com


Cell Number-9910046309

घर को दें राजसी लुक

आप रंग-रोगन करके एक नया लुक देते हैं। इसके साज-सज्जा में चार चांद लगाने के लिए  फैशनेबल कारपेट आजकल प्रचलन में है। इस फैशनेबल कारपेट से घर के फर्श की सुन्दरता में एक मनमोहक अंदाज़ आ जाता है। इसी क्रम में बाज़ार में फैशनेबल कारपेट घर की सुन्दरता में एक और खूबसूरत कड़ी के रूप में आया है।
 भरपूर वुलेन और बनाना सिल्क कारपेट कलेक्शन का रेंज बाज़ार में है, जो घर की रूमानियत, सुन्दरता और भव्यता को बेहतर अंदाज़ में ढाल रहा है। यह नया कारपेट कलेक्शन कई रंगों और रेंज में उपलब्ध है। यह चमकीले और आकर्षक कलेक्शन वुलेन और बनाना सिल्क से बना है, जिस पर उम्दा कढ़ाई की गई है। जो इस दीप पर्र्व की भव्यता को कई  गुणा बढ़ा सकता है। सुरूचिपूर्ण कढ़ाई से लैस यह कारपेट राजसी भव्यता लिए हुए संतुलित सुनहरे रंग के साथ-साथ गहरे लाल रंग, प्राकृतिक मटमैला रंग के साथ जुड़कर अनूठा संगम बनाता है, जो इसे रॉयल लुक प्रदान करता है। सौन्दर्यबोधक यह कारपेट आपके घर की सुन्दरता को काफी बढ़ाने में सक्षम है। कई खूबियों से भरपूर यह कारपेट  हाथों द्वारा निर्मित है, जो कई रंग, आकार में उपलब्ध है। प्रत्येक घर की आवश्यकतानुसार इस्तेमाल और इनवॉयरेन्मेंट फ्रेंडली इसे खास बनाता है। यह कारपेट फेस्टिव मूड को और ताजगी से भर सकता है। 

व्यक्तित्व का आईना है मेज

आपकी मेज आपके व्यक्तित्व का आईना है, जहां हर चीज़ साफ झलकती है। आप अपने घर या दफ्तर में किस प्रकार से मेजों का प्रयोग करते हैं, यह आपके बारे में हर एक कहानी बयां कर देती है। एक  रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार मेज यह बता सकता है कि आप किस मिजाज के मालिक हैं।
 यदि आपकी  मेज काफी साफ सुथरी है तो यह सादा जीवन का प्रतीक माना जाता है। आप सादगी में जीने को बेहतर मानते हैं। जानकर कहते हैं कि यदि आपकी मेज साफ-सुथरी है तो आप अंतर्मुखी व्यक्तित्व भी हो सकते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यदि आप बहिर्मुखी प्रवृति के हैं तो आप अपनी मेज को शोकेस या दूकान की खिड़की की तरह इस्तेमाल करते हैं। ऐसे लोगों के लिये मेज एक प्रकार शॉ ऑफ की तरह है, जो चीख-चीखकर लोगों को उनकी पसंद या नापसंद के बारे में बताती है। चिंतक या संवेदनशील व्यक्तियों की मेज पर कुछ ऊल-जलूल सी लगने वाली चीज़ भी हो सकती है, जैसे-किसी छुट्टïी की यादगार लम्हे के फोटो, दुलारे बच्चों की तस्वीर। कुछ व्यक्ति अपनी मेज पर नर्म नाजुक खिलौने रखते हैं, जिसका मतलब निकलता है कि मुझे पसंद करो। जानकार यह भी बताते हैं कि सोचने विचारने वाले लोग ऐसी चीजें मेज पर सजाना पसंद करते हैं, जिनसे उनकी छवि संवारने में मदद हो। वे या तो सर्टिफिकेट, अवार्ड, किताबें या ऐसी चीज़े सजाकर रखते हैं, जिनसे उनके कामधंधे के महत्व का अंदाज़ा हो, या ऐसी तस्वीरें जिनसे उनके शान का बखान होता हो। कठोर मन वाले लोग अपने काम की जगह पर भी घेरेबंदी बनाकर रखना पसंद करते हैं। उनकी कुर्सी, मेज और खिड़की के बीच होगी, उनकी मेज ऊपर उठी हो सकती है, कमरे का दरवाजा बंद रहता होगा- हो सकता है कि दीवार पर एक स्क्वाश का रैकेट टंगा हो, इस बात की निशानी कि उन्हें कड़े मुकाबले वाले खेल पसंद हैं। दूसरी ओर नर्मदिल लोगों का मेज स्वागत करता सा लगता है- आम तौर पर वे मेज से हटकर आपसे बातचीत करेंगे और अगर वे आपको चाय या कॉफी पूछें तो प्याला भी आपकी ओर अपने हाथों से ही बढ़ाएंगे।  मेज पर तरतीब से रखे फलों में छिपा संदेश है  कि मैं एक स्वस्थ बालक हूं- मैं मिनरल वॉटर पीता हूं। मेज पर रखे मुलायम खिलौनों का अर्थ है कि इस मेज का प्रयोग करने वाला व्यक्ति बच्चों जैसा, लचीला व्यक्तित्व का स्वामी हो सकता है और ऐसा व्यक्ति गर्मजोशी से दोस्ती करना पसंद करता है। मेज पर रखे अनोखे खिलौनों का अर्थ है कोई ऐसा इंसान जो हंसना-हंसाना चाहता है और साथियों से दोस्तों की तरह बर्ताव करना चाहता है । आप कभी-कभी सोचते होंगे कि देखो यह व्यक्ति कैसा है, जो अक्सर अपनी मेज पर पैसे, चाभियां, पर्स या मोबाइल फोन जैसी चीजें छोड़ देता है। आप ऐसेे लोगों को भुलक्कड़ या लापरवाह समझना बंद कर दीजिए- इसका 
अर्थ है कि वे लोगों पर भरोसा करते हैं। किसी मेज पर रखे पुराने थके हुए से माउस पैड को देखकर धोखा मत खाइए कि यह व्यक्ति पुराने विचारों का तो नहीं है, यदि आप ऐसा सोचते हैं तो अपनी मानसिकता बदल लीजिये वस्तुत: वो भी उस मेज पर बैठनेवाले का एक इश्तिहार है, जिसपर लिखा है मैं यहां काम करने आता हूं, दफ्तर को सजाने संवारने नहीं।

ऑफिस - ऑफिस

एक छोटे  ऑफिस  में भी कम से कम 20 गुणा 20 फीट जगह की आवश्यकता होती है। बेहतरीन डिजाइनिंग के लिये समकोण ऑफिस को तरजीह दी जाती है।ऑफिस को डिजाइन करने के पहले एक फ्लो चार्ट बनाया जाता है जो कि बजट और जगह पर आधारित होता है। यदि ऑफिस में रिसेप्सन की जरूरत है तो उसके लिये थोड़ी जगह छोड़ी जा सकती है।
आमतौर पर ऑफिस का 20 प्रतिशत गलियारे के लिये छोड़ा जाता है ताकि इस जगह पर आसानी से चहलकदमी की जा सके। असल में छोटे ऑफिसों को ऐसे व्यवस्थित करना चाहिये ताकि कम से कम जगह को ज्यादा से ज्यादा उपयोगी बनाया जा सके। ऑफिस के अंदर एक छोटी सी जगह को स्टोर की तरह इस्तेमाल करें। यदि ऑफिस में स्पेशल केबिन की आवश्यकता न हो तो उससे बचे रहें। क्योंकि केबिन बनवाने से अतिरिक्त जगह की ज़रूरत होती है। इससे अन्य कर्मचारियों को परेशानी भी उठानी पड़ सकती है। अत: टॉप एग्जिक्यूटिव या अकाउंट डिपार्टमेंट के अलावा अन्य डिपार्टमेंट को एक साथ ही एडजस्ट किया जा सकता है।
ऑफिस को डिजाइन करने से पहले अपने बजट और डिजाइन की अधिकतम उपयोगिता को समझ लेना जरूरी है। इंटीरियर, प्रबंधन की गुणवत्ता, समय, अन्य साधनों के आधार पर बजट प्लान किया जाता है। इसी प्रकार डिजाइनिंग आधुनिक उपकरण पर निर्भर करता है। तमाम उपकरणों को अपनी सहूलियत के अनुसार ही खरीदें। ध्यान रखें ऐसी चीजें खरीदें जो ऑफिस को मार्डन लुक भी देती हों और आपकी जरूरत के अनुसार सुविधाजनक भी हो। ऐसी किसी चीज को ऑफिस के लिये न खरीदें जो भविष्य में बोझ मात्र बनकर रह जाए। ऑफिस में इस प्रकार की चीजों से अतिरिक्त जगह का भी इस्तेमाल होता है। इसके अलावा बेवजह आर्थिक संकट का भी सामना करना पड़ सकता है। ऑफिस को सेट करने के लिये कांट्रेक्टर से संपर्क करें और कम से कम में ज्यादा से ज्यादा फायदे पर विचार-विमर्श अवश्य करें, लेकिन ध्यान रखें कि ऐसे किसी कांट्रेक्टर के पास न जाएं जिसका मोलभाव आपके आफिस की तुलना में ज्यादा हो।
ऑफिस को मार्डन लुक देने में गुड लाइटिंग, पेंटिंग कलर और कुछ इंटीरियर शोकेस की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऑफिस में कम से कम इतनी खिड़कियां हों ताकि दिन के उजाले में कृत्रिम रोशनी की जरूरत न पड़े। खिड़कियां होने से ऑफिस में खुली हवा आती है जो कि कर्मचारियों को सक्रिय रहने में मदद करती है। इससे काम में मन लगा रहता है और कम्पनी पर इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है। कम्पनी के डेकोरेशन के दौरान यह ध्यान रखें कि ऑफिस को डिपार्टमेंट अनुसार विभाजित करते हुए दीवारों का कम इस्तेमाल करें। दरअसल दीवार स्थायी होती है इसलिये उसे बार-बार तोड़कर बनवाना आसान नहीं होता। इसलिये दीवार की बजाय पतली प्लाई का इस्तेमाल करें।